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रक्षा बंधन पर भद्रा काल नहीं माना जाता शुभ, आखिर कौन हैं भद्रा और इस दौरान क्यों नहीं बांधी जाती राखी

रक्षा बंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। जानिए कौन हैं भद्रा, पंचांग में उन्हें कैसे स्थान मिला और इस साल रक्षा बंधन पर भद्रा का क्या प्रभाव रहेगा।

Raksha Bandhan - India TV Hindi
Image Source : PINTEREST भद्रा काल में क्यों नहीं बांधी जाती राखी

रक्षा बंधन भाई-बहन के प्यार और विश्वास का त्योहार है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। सनातन धर्म में किसी भी शुभ काम से पहले मुहूर्त देखने की परंपरा है। यही वजह है कि रक्षा बंधन पर भी भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। आखिर भद्रा कौन हैं और इस समय को अशुभ क्यों माना जाता है? रक्षा बंधन 2026 कब है? चलिए यहां जानते हैं सबकुछ

कौन हैं भद्रा?

पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रा सूर्य देव और छाया की पुत्री व शनिदेव की बहन हैं। भद्रा काले वर्ण, लंबे केश, बड़े दांत वाली तथा भयंकर रूप वाली कन्या हैं। उनका स्वभाव भी बेहद उग्र बताया गया है। कहा जाता है कि जन्म से ही वह यज्ञ और मांगलिक कार्यों में बाधा डालने लगी थीं। उनके इस स्वभाव को देखकर सूर्य देव उनके विवाह को लेकर चिंतित हुए, लेकिन कई लोगों ने विवाह प्रस्ताव ठुकरा दिए। इसके बाद सूर्य देव ने ब्रह्मा जी से सलाह ली।

ब्रह्मा जी ने दिया स्थान

मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने भद्रा को एक निश्चित समय में रहने का स्थान दिया और कहा कि वह पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल लोक में निर्धारित समय पर विचरण करें। इस दौरान जो व्यक्ति शुभ कार्य करे और तुम्हारा का सम्मान न करे, उसके कार्य में बाधा डाल सकती हो। इस तरह ब्रह्मदेव द्वारा भद्रा को पंचांग के विष्टि करण में स्थान दिया गया।

पंचांग में कैसे मिला स्थान?

हिंदू पंचांग के पांच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण होते हैं। तिथि के आधे भाग को करण कहा जाता है और एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण माने गए हैं। इनमें सात चर करणः बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि है। जबकि चार स्थिर करण: शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न हैं। इनमें विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है।

किन तिथियों में रहती हैं भद्रा?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शुक्ल पक्ष की अष्टमी और पूर्णिमा के पूर्वार्द्ध, चतुर्थी और एकादशी के उत्तरार्द्ध और कृष्ण पक्ष की तृतीया और दशमी के उत्तरार्द्ध, जबकि सप्तमी और चतुर्दशी के पूर्वार्द्ध में भद्रा रहती हैं। मान्यता है कि पृथ्वी लोक की भद्रा का समय शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं होता।

भद्रा में क्यों नहीं बांधते राखी?

भद्रा काल को उग्र माना जाता है। इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के साथ राखी बांधने से भी बचने की परंपरा है। पौराणिक कथाओं में रावण की बहन शूर्पणखा द्वारा भद्रा काल में राखी बांधने और बाद में रावण के विनाश का उल्लेख मिलता है। 

रक्षा बंधन 2026 पर नहीं होगी भद्रा की अड़चन

इस साल 28 अगस्त, शुक्रवार के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। इसलिए भद्रा के कारण राखी बांधने में कोई बाधा नहीं रहेगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार इस दिन सुबह का शुभ समय भी भद्रा से मुक्त रहेगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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