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30 जुलाई से शुरू हो रहा है पावन माह सावन, जानें सोमवारी व्रत के दिन कैसे करें महादेव की पूजा

हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान शिव की पूजा के लिए यह महीना अति उत्तम होता है। सावन माह में आने वाले सोमवार भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सावन सोमवार का व्रत करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

सावन 2026- India TV Hindi
Image Source : PEXELS सावन 2026

भगवान शिव के भक्तों के लिए सावन का पूरा महीना किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। इस माह में महादेव की सच्चे मन से आराधना करने से भक्तों के सभी दूर, तकलीफ दूर हो जाता है। इतना ही नहीं अगर उनकी कोई अधूरी इच्छा है वो भी पूरी हो जाती है। भगवान शिव अत्यंत भोले हैं वो एक लोटा जल और कुछ बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। तो अगर आपकी भी कोई मनोकामना है तो सावन माह में आने वाले सोमवार के दिन उपवास जरूर रखें। इसके अलावा सावन माह में कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है। इस साल 30 जुलाई 2026 से शिवजी के प्रिय माह सावन का आरंभ हो रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। तो चलिए अब जानते हैं कि सावन माह में कितने सोमवार पड़ेंगे और सोमवारी व्रत के दिन महादेव की पूजा कैसे करनी चाहिए।

सावन 2026 में कितने सोमवार पड़ेंगे?

हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरे माह में हर कोई शिव की भक्ति में लीन रहता है। हर शिव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है। आपको बता दें कि सावन में आने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। सावन सोमवार को सोमवारी व्रत भी कहते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भोलेनाथ और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाती हैं। इस साल सावन माह में 4 सोमवार पड़ेंगे। 

  • पहला सावन सोमवार- 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सावन सोमवार- 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सावन सोमवार- 17 अगस्त 2026
  • चौथा और अंतिम सावन सोमवार- 24 अगस्त 2026

सावन सोमवार (सोमवारी व्रत) पूजा विधि

  • सावन सोमवार के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि करें और साफ वस्त्र पहन लें। 
  • सावन सोमवार के दिन संभव हो तो हरा, केसरिया या सफेद रंग के कपड़े पहनें।
  • इसके बाद घर के मंदिर या शिव मंदिर में जाकर व्रत का संकल्प लें।
  • अब सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें। 
  • जल चढ़ाने के बाद कच्चा दूध, चीनी, शहद, घी और दही से शिवलिंग का जलाभिषेक करें। आखिर में एक बार फिर शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं।
  • फिर शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं। 
  • चंदन अर्पित करने के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र (बिना कटा-फटा), सफेद फूल, भांग और धतूरा चढ़ाएं।
  • शिवलिंग के पास दीया और धूपबत्ती जलाएं और  'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में शिवजी की आरती करें।
  • आरती के बाद भगवान शिव को फल का भोग लगाएं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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