Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होगी। इसके अलावा अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान भी किया जाता है। पूरे साल में 12 अमावस्या आती हैं लेकिन इनमें सोमवती अमावस्या अत्यंत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। तो आइए आज जानते हैं कि सोमवती अमावस्या अन्य सामान्य अमावस्या से अधिक फलदायी क्यों मानी जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
सोमवती अमावस्या 2026
15 जून 2026, सोमवार को ज्येष्ठ अमावस्या मनाई जाएगी। आपको बता दें कि जब अमावस्या सोमवार को मनाई जाती है तब इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में यह संयोग अत्यंत ही शुभ और दुर्लभ माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त 15 जून को प्रात:काल 04 बजकर 2 मिनट से लेकर 04 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से दोपहर 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
सोमवती अमावस्या और सामान्य अमावस्या में अंतर
- सामान्य अमावस्या सप्ताह के किसी भी दिन पड़ सकी है।
- वहीं सोमवती अमावस्या सिर्फ सोमवार के दिन ही पड़ती है।
- सामान्य अमावस्या मुख्य रूप से पितरों को समर्पित होता है।
- सोमवती अमावस्या के दिन पितरों के साथ-साथ भगवान शिव और चंद्र देव की भी विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
- सामान्य अमावस्या हर महीने आती है, जबकि सोमवती अमावस्या साल में केवल एक, दो या बेहद दुर्लभ स्थिति में तीन बार ही आती है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की उपासना करना अत्यंत ही फलदायी होता है। महादेव की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान, दान, पुण्य, व्रत, पूजा और जप-तप करने से व्यक्ति के धन-धान्य में बरकत होती है और साथ ही उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही धार्मिक मान्यता है कि अगर सुहागिन महिलाएं सोमवती अमावस्या का व्रत करती हैं तो उनके पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहता है।
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल पेड़ की पूजा का भी विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना जाता है। पीपल पेड़ की पूजा करने से भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो वो सोमवती अमावस्या के दिन गंगा या अन्य किसी पवित्र नदी में स्नान-दान जरूर करें। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष भी दूर होता है। बता दें कि जब पितरों की कृपा रहती है तो वंश में वृद्धि होती है और व्यक्ति के हमेशा तरक्की करता रहता है, उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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