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वट सावित्री व्रत में बिना चबाए क्यों निगले जाते हैं कच्चे चने? जानिए इस पूजा में भीगे चने का महत्व और रहस्य

Vat Savitri Vrat Maine Kyu Nigle Jate Hain Chane: वट सावित्री व्रत में काले चने का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावित्री ने चने के माध्यम से ही यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। आज भी महिलाएं इस व्रत में कच्चे चने निगलती हैं। ऐसा करने के पीछे वजह क्या है चलिए जानते हैं।

Vat Savitri Vrat 2026- India TV Hindi
Image Source : PTI वट सावित्री व्रत में भीगे चने का महत्व

Vat Savitri Vrat Maine Kyu Nigle Jate Hain Chane: सनातन धर्म की सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री का व्रत बेहद खास माना जाता है। साल में एक दिन आने वाला यह पर्व बहुत खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। इस व्रत से जुड़ी कई परंपराएं हैं, लेकिन सबसे अनोखी परंपरा बिना चबाए कच्चे काले चने निगलने की मानी जाती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। चलिए जानते हैं क्यों इस दिन व्रती काले भीगे चने बिना चबाए निगलती हैं। 

सुहागिनों का विशेष पर्व

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। कई जगहों पर यह व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा को भी रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे सोलह शृंगार करती हैं और  विधि-विधान से बरगद के वृक्ष की पूजा करके पति के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।

वट वृक्ष का क्यों है खास महत्व

वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ का विशेष महत्व होता है। यह वट वृक्ष लंबी आयु और स्थिरता का प्रतीक कहा गया है। इसकी नीचे लटकती शाखाओं को देवी सावित्री का स्वरूप माना जाता है। महिलाएं इस वृक्ष की परिक्रमा करके सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पूजा में काले चने का महत्व

वट सावित्री व्रत की पूजा में काले भीगे चने को प्रसाद के रूप में रखा जाता है। खास बात यह है कि महिलाएं इन चनों को चबाती नहीं हैं, बल्कि सीधे निगलती हैं। इसके पीछे एक धार्मिक कथा जुड़ी हुई है, जिसे वट सावित्री व्रत का सबसे महत्वपूर्ण रहस्य माना जाता है।

क्यों निगले जाते हैं बिना चबाए चने

पौराणिक कथा के अनुसार, जब सत्यवान के प्राण यमराज ले गए थे, तब देवी सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और पतिव्रता धर्म से यमराज को प्रसन्न कर लिया। इसके बाद यमराज ने चने के रूप में सत्यवान के प्राण सावित्री को लौटाए। सावित्री उन चनों को लेकर सत्यवान की मृत देह के पास पहुंचीं और पति के मुख में चने रख दिया। सत्यवान के मुख में यमराज द्वारा दिए गए चने फूंकने से सावित्री देवी के पति को फिर से जीवनदान मिला था। इसी मान्यता के कारण वट सावित्री व्रत की पूजा के दौरान काले चने को प्रसाद के रूप में प्रयोग किया जाने लगा। तभी से कच्चे काले चनों को बिना चबाए निगलने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि ऐसा करना पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य का प्रतीक होता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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