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Vat Savitri Vrat Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत के दिन इस विधि से करें पूजा, सुखमय वैवाहिक जीवन का मिलेगा वरदान

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : May 15, 2026 12:11 pm IST,  Updated : May 15, 2026 12:11 pm IST

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत सुखमय वैवाहिक जीवन और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से ये एक है। साल 2026 में 16 मई को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा, इस दिन किस विधि से आपको पूजा करनी चाहिए आइए जानते हैं विस्तार से।

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi- India TV Hindi
वट सावित्री व्रत पूजा विधि Image Source : INDIA TV

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस साल 16 मई 2026 को यह व्रत रखा जाएगा। यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ फलदायी व्रतों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने अपने संकल्प और पतिव्रत के दम पर यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पर मजबूर कर दिया था। इसीलिए आज भी महिलाएं सुखद वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि व्रत सावित्री का व्रत रखने की विधि क्या है और कैसे परिणाम इस व्रत का पालन करने से आपको प्राप्त होते हैं। 

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री 

वट सावित्री व्रत रखने से पहले आपको कुछ आवश्यक सामग्रियों को जरूर एकत्रित कर लेना चाहिए। सावित्री और सत्यवान की तस्वीर, कच्चा सूत, बांस का पंखा, भीगा हुआ चना, धूप, दीप, घी, फूल, सुहाग का सामान और जल का कलश। इन सारी चीजों के साथ ही आपको वट सावित्री व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। 

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि 

  • वट सावित्री व्रत वाले दिन आपको सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान-ध्यान आदि करना चाहिए और उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। 
  • महिलाएं इस दिन लाल या पीले रंग की साड़ी पहनें तो शुभ माना जाता है। 
  • इसके बाद आपको पूजा स्थल के बाद बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 
  • इसके बाद वट वृक्ष के पास जाकर आपको सत्यवान-सावित्री की तस्वीर वहां स्थापित करनी चाहिए और चंदन, रोली आदि से तिलक करना चाहिए। 
  • साथ ही आपको वट वृक्ष की जल पर जल भी अर्पित करना चाहिए। इसके बाद माता सावित्री को सुहाग सामग्री आपको अर्पित करनी चाहिए। 
  • इसके बाद कच्चे सूत को लेकर 7, 12, 108 बार परिक्रमा करते हुए इसे वट वृक्ष पर बांधना चाहिए। 
  • अब सत्यवान-सावित्री की व्रत कथा का पाठ या श्रवण आपको करना चाहिए। 
  • व्रत के अंत में फल, सुहाग सामग्री किसी विवाहित या सास को आपको देना चाहिए। 

वट सावित्री व्रत का महत्व 

वट सावित्री का व्रत रखने से आपको वैवाहिक जीवन में सुखद फल तो मिलते ही हैं साथ ही जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी आप लाभ प्राप्त करते हैं। इस दिन व्रत रखने से यमराज का आशीर्वाद आपको मिलता है और रोग-दोष से आप मुक्ति होते हैं। इसके साथ ही पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद भी इस दिन व्रत रखने से दूर होने लगते हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है जहां हमारे पितरों का वास माना गया है इसलिए वट सावित्री व्रत और वट वृक्ष की पूजा करने से हमारे पितरों का आशीर्वाद भी हम पाते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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