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Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics: ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा...आज भगवान विश्वकर्मा की पूजा इस आरती के साथ करें

आज विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करने से व्यापार और तकनीकी से जुड़े क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है। विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की आरती जरूर करें।

विश्वकर्मा जी की आरती- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV विश्वकर्मा जी की आरती

विश्वकर्मा पूजा के दिन सृष्टि के पहले शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को यान्त्रिकी, वास्तुकला विज्ञान और स्थापत्य वेद के रचयिता के रूप में पूजा जाता है। सभी वर्ग एवं विधा के शिल्पकारों द्वारा भगवान विश्वकर्मा को संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। इसीलिये विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर अधिकांश शिल्पकार एवं व्यापारी आदि अपने व्यापारिक यन्त्रों की पूजा भी करते हैं।

ऋग्वेद में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड के वास्तुकार एवं रचनात्मकता के मूर्त स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। विश्वकर्मा जी ने सृष्टि-सृजन के कार्य में भगवान ब्रह्मा की सहायता करने के लिए संसार के मानचित्र की रचना की थी। विभिन्न धर्मग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के अनुसार भगवान कृष्ण के लिये द्वारका नगरी, पांडवों के लिए इन्द्रप्रस्थ के महल, सुदामा जी के लिए सुदामापुरी, सुवर्णमयी लङ्का और देवताओं के स्वर्गलोक का निर्माण विश्वकर्मा जी ने ही किया था। विश्वकर्मा पूजा पर्व को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी मनाया जाता है। आज विश्वकर्मा पूजा के दिन विधिपूर्वक पूजा करने के साथ ही भगवान विश्वकर्मा की आरती जरूर करें।

भगवान विश्वकर्मा जी की आरती 

ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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