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पंचांग: गुरुवार को विश्वकर्मा जयंती और कन्या संक्रांति का शुभ संयोग, सूर्य षष्ठी का रखा जाएगा व्रत, नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल टाइम

17 सितंबर 2026 का पंचांग: गुरुवार के दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। कल सूर्य षष्ठी का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जाएगी। जानिए 17 सितंबर 2026 का पंचांग और राहुकाल का समय।

panchang, 17 सितंबर 2026 का पंचांग- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV 17 सितंबर 2026 का पंचांग
17 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और गुरुवार का दिन है। कल षष्ठी तिथि सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसके बाद उसके बाद सप्तमी तिथि लग जाएगी। इसके अलावा कल सूर्य षष्ठी व्रत किया जायेगा। वहीं, कल शाम 7 बजकर 53 मिनट तक रवि योग रहेगा। साथ ही कल 17 सितंबर को शाम 7 बजकर 54 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। कल भगवान विश्वकर्मा जयंती भी है। इसके अलावा कल सुबह 7 बजकर 52 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में गोचर करेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए गुरुवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
 
17 सितंबर 2026 का पंचांग
  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि - 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक
  • रवि योग- 17 सितंबर को शाम 7 बजकर 53 मिनट तक 
  • अनुराधा नक्षत्र- 17 सितंबर को शाम 7 बजकर 54 मिनट तक 
  • 17 सितंबर 2026 विशेष- सूर्य षष्ठी व्रत, विश्वकर्मा जयंती, सूर्य का कन्या राशि में गोचर
17 सितंबर 2026 शुभ समय
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:33 ए एम से 05:20 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 04:57 ए एम से 06:07 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:51 ए एम से 12:40 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:18 पी एम से 03:07 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:24 पी एम से 06:47 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:24 पी एम से 07:34 पी एम
  • अमृत काल- 08:24 ए एम से 10:10 ए एम
राहुकाल का समय
  • दिल्ली- दोपहर 01:48 से दोपहर बाद 03:20 तक
  • मुंबई- दोपहर 02:05 से दोपहर बाद 03:36 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 01:49 से दोपहर बाद 03:22 तक
  • लखनऊ- दोपहर 01:33 से दोपहर बाद 03:05 तक
  • भोपाल- दोपहर 01:46 से दोपहर बाद 03:18 तक
  • कोलकाता- दोपहर 01:03 से दोपहर 02:34 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर 02:05 से दोपहर बाद 03:37 तक
  • चेन्नई- दोपहर 01:35 से दोपहर बाद 03:06 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 
  • सूर्योदय- सुबह 06:07 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 06:24 बजे
भगवान विश्वकर्मा जयंती
 
भगवान विश्वकर्मा का जन्म सूर्य संक्रांति के दिन हुआ था। विश्वकर्मा जी को धरती के प्रथम इंजीनियर और देवताओं का शिल्पकार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही सतयुग में स्वर्ग, त्रेतायुग में लंका, द्वापर में द्वारिका और कलियुग में जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों का निर्माण किया है। इस दिन लोग अपना व्यापार बढ़ाने के लिए अपनी दुकानों और कारखानों में स्थित मशीनों की पूजा करते हैं।
 
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)