23 सितंबर को रात 9 बजकर 57 मिनट से पंचक आरंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में पंचक को शुभ नहीं माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। बता दें कि धनिष्ठा एक पंचक नक्षत्र है। धनिष्ठा से लेकर रेवती तक के पांच नक्षत्रों को पंचक नक्षत्र कहा जाता है। पंचक की श्रेणी में धनिष्ठा पहला पंचक है। पंचक हर महीने में लगता है और पांच दिनों तक चलता है। बुधवार से शुरू हुआ पंचक का समापन 28 सितंबर की सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर होगा। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, पंचक का नाम उस दिन यानी वार पर निर्भर करता है जिस दिन इसकी शुरुआत होती है। तो चलिए जानते हैं कि पंचक में क्या नहीं करना चाहिए।
पंचक में क्या नहीं करना चाहिए?
- पंचक के दौरान घास या लकड़ी सब इकट्ठा नहीं करना चाहिए।
- पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा भी नहीं करनी चाहिए। यह दिशा यम की दिशा मानी जाती है।
- पंचक के दौरान चारपाई बनवाने की भी मनाही होती है। ऐसा करने से आपके ऊपर कोई बड़ा संकट आ सकता है।
- पंचक में घर की छत भी नहीं बनाना चाहिए। वरना आपके घर में हमेशा क्लेश होते रहेंगे और धन का भी नुकसान होगा।
- पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
राज पंचक
बता दें कि पंचक में कुछ पंचक ऐसे होते हैं जो शुभ माना जाता है। ऐसे ही बुधवार से शुरू होने वाले पंचक दोष-मुक्त पंचक है। हालांकि फिर भी पंचक में वर्जित कार्यों को करने से बचना चाहिए। पंचक में सबसे अधिक अशुभ मृत्यु पंचक को माना जाता है। शनिवार के दिन से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है।। शास्त्रों में इस पंचक को बेहद कष्टकारी माना गया है। इस दौरान दुर्घटना होने की संभावना अधिक रहती है इसलिए इस पंचक में जोखिम भरे कार्यों को करने से मना किया जाता है।
पंचक में क्या उपाय करना चाहिए?
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ।
- पंचक में दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। तो गरीब और जरूरतमंद को जरूरत की चीजें दान करें।
- पंचक के दौरान रोजाना सुबह के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और रोली डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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