देवी दुर्गा के 9 रूप और इनसे जुड़े चक्र, जानें इनका महत्व और किस स्वरूप की पूजा करने से क्या मिलता है फल
माता दुर्गा के नौ स्वरूप हैं और हर स्वरूप की आराधना करने से कोई-न-कोई चक्र जाग्रत होता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि कौन सी देवी किस चक्र का प्रतिनिधित्व करती है।

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी का हर स्वरूप किसी न किसी चक्र को जाग्रत करने में भक्तों की मदद कर सकता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि किस देवी की पूजा से कौन सा चक्र जाग्रत होता है। इसके साथ ही हम आपको बताएंगे कि देवी के किस स्वरूप की पूजा करने से क्या फल आपको मिल सकते हैं। आपको बता दें कि योग परंपरा में सात प्रमुख चक्रों के बारे में बताया गया है। यह चक्र हैं मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा, सहस्रार। प्रत्येक चक्र का अपना महत्व है और हर चक्र के जाग्रत होने पर कुछ न कुछ विशेष गुण व्यक्ति को प्राप्त हो सकते हैं। वहीं सभी चक्रों के जाग्रत होने पर व्यक्ति को सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं।
माता शैलपुत्री
माता शैलपुत्री की आराधना से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है। यह चक्र चेतना को जगाता है।
फल- माता की आराधना करने से स्थिरता, साहस और जीवन में संतुलन की प्राप्ति होती है।
माता ब्रह्मचारिणी
देवी दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से स्वाधिष्ठान चक्र जाग्रत होता है। इस चक्र के जाग्रत होने से संयम की प्राप्ति होती है।
फल- माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान, संयम की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्यक्ति का आध्यात्मिक उत्थान भी होता है।
माता चंद्रघंटा
देवी चंद्रघंटा की आराधना से मणिपुर चक्र जाग्रत होता है जो एकाग्रता को बढ़ाता है।
फल- माता की पूजा करने से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक शक्ति मिलती है और व्यक्ति निर्भीक होता है।
माता कुष्माण्डा
देवी दुर्गा का चौथे स्वरूप की पूजा करने से अनाहत चक्र जाग्रत होता है। इस चक्र के जाग्रत होने से जीवन ऊर्जा प्राप्त होती है।
फल- माता की आराधना से मानसिक और शारीरिक शक्ति बढ़ती है, व्यक्ति परम तत्व के साथ जुड़ाव महसूस करता है। इसके साथ ही हर समय ऊर्जा व्यक्ति को महसूस होती है।
स्कंदमाता
माता के इस स्वरूप की पूजा करने से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है। यह चक्र वाणी में सत्य और मिठास भरने वाला माना जाता है।
फल- स्कंदमाता की पूजा से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है जिससे संवाद करने में व्यक्ति माहिर हो जाता है, ऐसे लोग सत्य बोलते हैं और साथ ही स्नेह और परोपकार की भावना भी जाग्रत होती है।
माता कात्यायनी
माता कात्यायनी की पूजा करने से आज्ञा चक्र जाग्रत होता है। इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति भविष्य देख सकता है। इसे तीसरा नेत्र भी कहा जाता है।
फल- माता कात्यायनी की पूजा करने से आज्ञा चक्र यदि जाग्रत हुआ तो व्यक्ति हर किसी के बारे में जान सकता है। मानसिक शक्ति बढ़ती है और हर समय व्यक्ति सकारात्मकता से भरा रहता है।
माता कालरात्रि
माता की पूजा करने से मूलाधार जाग्रत भी होता है साथ ही अंधकार का नाश भी होता है।
फल- माता कालरात्रि की पूजा करने से भय, रोग-दोष से आपको मुक्ति मिल सकती है। इनकी पूजा से अज्ञान का अंधकार दूर होता है।
माता महागौरी
माता की आराधना से सहस्रार चक्र जाग्रत होता है जिसे मुकुट चक्र भी कहा जाता है। इस चक्र के जाग्रत होने से पवित्रता तन, मन और आत्मा में आती है।
फल- माता महागौरी की पूजा से शांति, सुख और परम ज्ञान की प्राप्ति होती है।
माता सिद्धिदात्री
देवी दुर्गा के अंतिम स्वरूप माता सिद्धिदात्री की आराधना से भी सहस्रार चक्र ही जाग्रत होता है और व्यक्ति को दिव्यता प्राप्त हो सकती है।
फल- माता की पूजा करने से सभी सिद्धियां प्राप्त हो सकती है। इनकी आराधना करने से आध्यात्मिक पथ पर आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
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यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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