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दिवाली के दिन अभ्यंग स्नान कब किया जाएगा? जानें सही समय, विधि और महत्व

दिवाली से पहले चतुर्दशी तिथि या नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान किया जाता है। धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से अभ्यंग स्नान को बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में अभ्यंग स्नान का शुभ समय कब है और अभ्यंग स्नान की विधि क्या है, आइए जानते हैं विस्तार से।

Abhyang Snan- India TV Hindi
Image Source : PINTEREST अभ्यंग स्नान 2026

दीपोत्सव के पांच दिवसीय पर्व के दौरान अभ्यंग स्नान का भी बड़ा महत्व है। अभ्यंग स्नान हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इसी दिन नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और रूप चौदस मनाने का भी विधान है। अभ्यंग स्नान को आरोग्यदायक माना गया है। साल 2026 में अभ्यंग स्नान कब किया जाएगा, स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है और किस विधि से स्नान करना है आइए विस्तार से जानते हैं। 

अभ्यंग स्नान कब किया जाएगा? 

अभ्यंग स्नान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सूर्योदय के समय किया जाता है। साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी और 8 नवंबर की सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि में चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को है इसलिए अभ्यंग स्नान 8 नवंबर को ही किया जाएगा और इसी दिन दिवाली का त्योहार भी मनाया जाएगा। 

  • अभ्यंग स्नान शुभ मुहूर्त-  सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक। 

अभ्यंग स्नान विधि 

अभ्यंग स्नान के लिए आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए। स्नान करने से पहले शरीर पर तिल के तेल की मालिश आपको करनी चाहिए। माना जाता है कि तेल की मालिश करने से वात दोष दूर होता है और त्वचा से जुड़े रोगों से मुक्ति मिलती है। तेल लगाने के बाद बेसन, हल्दी, चंदन और पारंपरिक उबटन भी आप शरीर पर लगा सकते हैं। इसके बाद आपको नहाने के पानी में अपमार्ग या तुलसी के पत्ते डालने चाहिए और फिर स्नान करना चाहिए। आप घर में भी स्नान कर सकते हैं या किसी पवित्र नदी में भी डुबकी लगा सकते हैं। स्नान करने के बाद आपको भगवान कृष्ण और हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। 

अभ्यंग स्नान का महत्व और लाभ 

माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करने के बाद अपने शरीर से रक्त और गंदगी को दूर करने के लिए नरक चतुर्दशी के दिन तेल उबटन से स्नान किया था। तब से ही नरक चतुर्दशी की सुबह अभ्यंग स्नान करने की परंपरा शुरू हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अभ्यंग स्नान करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है और नकारात्मकता से भी व्यक्ति को छुटकारा मिलता है। सौंदर्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी अभ्यंग स्नान किया जाता है। अभ्यंग स्नान करने से वात दोष दूर होता है और त्वचा में भी निखार आता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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