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नरक चतुर्दशी कब है 7 या 8 नवंबर? नोट कर लें सही तारीख, पूजा विधि और अभ्यंग स्नान मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Nov 06, 2026 07:47 am IST,  Updated : Nov 06, 2026 07:48 am IST

नरक चतुर्दशी का पावन पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व आमतौर पर दीपावली से एक दिन पहले पड़ता है। लेकिन इस बार इस त्योहार की तिथि को लेकर काफी कन्फ्यूजन चल रहा है।

नरक चतुर्दशी मुहूर्त 2026- India TV Hindi
नरक चतुर्दशी मुहूर्त 2026 Image Source : INDIA TV

नरक चतुर्दशी के दिन को छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से जाना जाता है। तो वहीं कई जगहों पर इसे भूत चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से भी मनाया जाता है। पंचांग अनुसार यह पर्व बड़ी दिवाली से एक दिन पहले पड़ता है, लेकिन इस साल चतुर्दशी तिथि दो दिन रहने के कारण इस त्योहार की डेट को लेकर काफी कन्फ्यूजन चल रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान करने से नरक का मुंह नहीं देखना पड़ता। साथ ही विधि विधान पूजन करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं और शाम में एक दीपक यम के नाम से भी निकालते हैं। चलिए जानते हैं नरक चतुर्दशी कब मनाई जाएगी और अभ्यंग स्नान मुहूर्त क्या रहेगा।

नरक चतुर्दशी 2026 डेट और मुहूर्त

नरत चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है और इस साल ये तिथि 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे से 8 नवंबर की सुबह 11:27 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार यह पावन पर्व 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। 

नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान मुहूर्त 2026

नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सुबह 05:41 से 06:38 बजे तक रहेगा। तो वहीं नरक चतुर्दशी के दिन चन्द्रोदय का समय सुबह 05:41 बजे का है।

नरक चतुर्दशी के दिन क्या-क्या करना चाहिए?

  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में तेल स्नान करना चाहिए।
  • इस दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व होता है।
  • इस दिन नये वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • मिट्टी के दीप प्रज्वलित करने चाहिए।

नरक चतुर्दशी पूजा विधि 

  • नरक चतुर्दशी की पूजा शाम में की जाती है।
  • इसके लिए पूजा स्थल को साफ करके वहां आटे या चावल की मदद से एक स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। 
  • अब चौकी स्थापित करके उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • फिर चौकी पर माता लक्ष्मी, गणेश जी, हनुमान जी और श्रीकृष्ण भगवान की मूर्ति स्थापित करें।
  • चौकी की दाएं तरफ एक घी का दीपक जलाएं।
  • भगवानों के आसन के स्वरूप में चौकी पर कुछ अक्षत डालें।
  • अब मिट्टी के 14 दीपक प्रज्वलित करके पूजा की चौकी के पास रखें।
  • फिर जल पात्र से तीन बार इन दीपकों की आचमन विधि करें और चौथी बार में जल से अपना हाथ साफ करें। 
  • एक दीपक यम का भी जलाएं। 
  • इसके बाद श्री गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान कृष्ण, हनुमान जी और यमदीप पर गंगाजल छिड़कें।
  • सभी देवी-देवताओं की हल्दी, कुमकुम, रोली, चंदन, पुष्प आदि से विधि विधान पूजा करें। सभी विराजमान देवों को कलावा अर्पित करें। 
  • धुप-दीप जलाएं।
  • माता लक्ष्मी और गणेश भगवान की आरती करें।
  • मिठाई और गुड़-चना का भोग लगाएं।
  • घर के मुख्य द्वार समेत बाकी जगहों पर दीपक रखें और यमराज के लिए जलाए गए दीप को घर के बाहर रखें।
  • इसके बाद घर के सदस्यों में भोग अर्पित करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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