Ganesh Ji Ki Kahani (Sheetala Ashtami Ki Katha): शीतला अष्टमी हिंदुओं का एक बड़ा त्योहार है जो हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु मां शीतला की विधि विधान पूजा करके उन्हें बासी भोजन का भोग लगाते हैं। कहते हैं मां शीतला को ठंडे और बासी भोजन का भोग लगाने से उनकी कृपा शीघ्र ही प्राप्त हो जाती है। इस दिन भक्त मां शीतला की कथा भी सुनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस त्योहार पर गणेश जी की कहानी सुनना भी बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। आज हम आपको गणेश जी की ऐसी कथा के बारे में बताएंगे जिसे हर व्रत-त्योहार में जरूर पढ़ना चाहिए।
गणेश जी की कहानी (Ganesh Ji Ki Kahani)
गणेश जी की कहानी के अनुसार एक बुढ़िया थी जो बहुत गरीब थी और उसकी आंखों की रोशनी जा चुकी थी। उसके एक बेटा और बहू थे। बुढ़िया भगवान गणेश की बड़ी भक्त थी और नियम से उनकी पूजा किया करती थी। एक दिन गणेश जी ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और बुढ़िया से बोले - बुढ़िया मां! तू जो चाहे सो मांग ले। बुढ़िया बोली- मुझे मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू? तब गणेशजी बोले - एक काम कर अपने बहू-बेटे से पूछकर मांग ले। तब बुढ़िया अपने बेटे के पास गई और बोली - 'गणेशजी कहते हैं तू कुछ मांग ले और मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि मैं क्या मांगू? पुत्र ने कहा- मां! तू धन मांग ले। बहू से पूछा तो बहू ने कहा- आप अपने लिए नाती मांग लें।
तब बुढ़िया ने सोचा कि ये दोनों तो अपने-अपने मतलब की बात कह रहे हैं। अत: इसके बाद बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा, तो उन्होंने कहा- बुढ़िया! तेरा तो अब थोड़ा ही जीवन बचा है, क्यों तू धन मांगे और क्यों नाती मांगे। तू तो अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी बची हुई जिंदगी आराम से कट जाए। इसके बाद बुढ़िया भगवान गणेश के पास गई और बोली कि अगर आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता, दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।
गणेश जी कहने लगे कि बुढ़िया मां! तुने तो हमें ठग दिया। फिर भी जो तूने मांगा है वचन के अनुसार सब तुझे मिलेगा। इतना कहकर गणेशजी अंतर्धान हो गए। उधर बुढ़िया माई को वो सबकुछ प्राप्त हुआ जो उसने गणेश जी से मांगा था। हे गणेशजी महाराज! जैसे तुमने उस बुढ़िया मां को सबकुछ दिया, वैसे ही सबको देना।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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