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Guru Pradosh Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है गुरु प्रदोष व्रत, प्रदोष काल में जरूर पढ़ें ये पावन कथा

Guru Pradosh Vrat Katha: आज नये साल का पहला प्रदोष व्रत है। सनातन धर्म में इस व्रत की विशेष महिमा बताई गई है। कहते हैं तो कोई श्रद्धालु ये व्रत रखता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती। यहां आप जानेंगे गुरु प्रदोष व्रत की कथा।

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Image Source : CANVA गुरु प्रदोष व्रत कथा

Guru Pradosh Vrat Katha: आज गुरु प्रदोष व्रत है। जिसे बृहस्पति प्रदोष भी कहा जाता है। धार्मिक मान्याओं अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। गुरु प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त की बात करें तो आज शाम 05:35 से 08:19 बजे तक का समय प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ रहेगा। यहां आप जानेंगे गुरु प्रदोष व्रत की कथा।

गुरु प्रदोष व्रत कथा (Guru Pradosh Vrat Katha)

गुरु प्रदोष व्रत कथा के अनुसार एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध छिड़ गया था जिसमें देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर दिया था। यह देख वृत्रासुर स्वयं युद्ध के लिए पहुंचा। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण किया जिससे भयभीत होकर सभी देवता गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहुंचे। तब बृहस्पति महाराज ने पहले देवताओं को वृत्रासुर के बारे में बताते हुआ कहा कि वृत्रासुर पूर्व समय में चित्ररथ नाम का राजा था। जो एक बार कैलाश पर्वत पहुंचा। वहां शिव जी के वाम अंग में माता पार्वती को देख उसने उपहास उड़ाते हुए बोला- हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं। लेकिन देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे।

चित्ररथ के मुख से ऐसी बातें सुन माता पार्वती क्रोधित हो गईं और चित्ररथ को उन्होंने श्राप दिया कि तू दैत्य स्वरूप धारण करेगा। जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हो गया और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्रासुर बना। गुरुदेव बृहस्पति जी ने कहा कि वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिव भक्त रहा है। अतः हे इन्द्र तुम सभी बृहस्पति प्रदोष करो इससे शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी। देवताओं ने गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से शीघ्र ही वृत्रासुर पर विजय प्राप्त कर ली।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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