सनातन धर्म में हरछठ यानी हलषष्ठी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ हलषष्ठी माता की कथा का पाठ और आरती करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा से आरती करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यहां पढ़िए हलषष्ठी माता की आरती के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में।
संतान से जुड़ी बाधाएं दूर होने की करते हैं कामना
हर साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हरछठ पर्व इस साल 2 सितंबर को है। श्री हलषष्ठी माता की आरती का पाठ हरछठ व्रत के दौरान विशेष रूप से किया जाता है। माताएं पूजा के समय दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक माता का स्मरण करती हैं और आरती गाकर अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलषष्ठी माता की आराधना करने से संतान पर माता की कृपा बनी रहती है और संतान से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है। आरती में माता की महिमा और उनके आशीर्वाद का वर्णन किया जाता है। पूजा के अंत में श्रद्धा और भक्ति के साथ हलषष्ठी माता की आरती करना शुभ माना जाता है।
हलषष्ठी माता की आरती (Halshasthi Mata Aarti)
जय षष्ठी माते जय हलषष्ठी माते।
नीराजनममरैर्कृतमाधात्रे जाते॥
|| जय हल…||
करुणामयि गुणशीले तिथिशीलेऽभयदे।
वचसातीतमहिम्ने वात्सल्येऽऽनन्दे॥
|| जय हल…||
कंसभगिन्या पूज्ये चन्द्रललितसुतदे।
वंशकरे प्रभुरिवगुणयुक्तवत्सकप्रदे॥
|| जय हल…||
वैदर्भ्याऽपि सुपूज्ये नष्टपुत्रदात्रे।
श्रीखण्डप्रसवाङ्गे वरुणामोदकरे॥
|| जय हल…||
क्रीडनकेन भवाब्धे पूज्ये सौख्यवरे।
अम्बुयुक्तचीरैरजिरेऽजरवज्रकरे॥
|| जय हल…||
महिषीदुग्धप्रभाऽऽर्चे वरदे धर्मधरे।
कृष्णाग्रजगुणयुक्ते शुभ्रे कृष्णप्रिये॥
| जय हल…||
वरुणेनादियुगेऽस्मिन् हरिश्चद्रकुलदे।
स्वानन्दे प्रामीत्योऋणत्रिशङ्कुजनने॥
|| जय हल…||
गायन्तीति मनुष्याः तीरे चाम्बुवरे।
काले दोषविमुक्ता वरुणानन्दमये॥
|| जय हल…||
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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