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Janmashtami Vrat Kab Hai 2025: आज या कल कब रखा जाएगा जन्माष्टमी का व्रत, जान लें सही डेट

Janmashtami Vrat Kab Hai 2025 (जन्माष्टमी व्रत कब है): जन्माष्टमी व्रत भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। कुछ लोग सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक ये व्रत रहते हैं तो कई लोग अष्टमी तिथि के खत्म होने तक ये व्रत रखते हैं। चलिए आपको बताते हैं इस साल जन्माष्टमी व्रत कब रखा जाएगा और इसके नियम क्या हैं।

Janmashtami vrat 2025- India TV Hindi
Image Source : CANVA जन्माष्टमी व्रत कब है 2025 में

Janmashtami Vrat Kab Hai 2025 (जन्माष्टमी व्रत कब है): सनातन धर्म में जन्माष्टमी का व्रत बेहद पुण्यदायी माना गया है। कहते हैं जो कोई भी इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसके जीवन की समस्त परेशानियों का अंत हो जाता है। इस साल ये व्रत 16 अगस्त 2025, शनिवार को रखा जाएगा और व्रत का पारण 17 अगस्त की सुबह 5 बजकर 55 मिनट के बाद किया जा सकेगा। वहीं कुछ लोग जन्माष्टमी व्रत का पारण व्रत वाली रात में ही कृष्ण भगवान की पूजा के बाद कर लेते हैं। चलिए जानते हैं जन्माष्टमी व्रत के नियम क्या हैं।

जन्माष्टमी व्रत कब है 2025 (Krishna Janmashtami Vrat 2025 Date And Muhurat)

जन्माष्टमी व्रत कब है 2025 16 अगस्त 2025, शनिवार
जन्माष्टमी व्रत का पारण 2025 05:51 AM, अगस्त 17 के बाद
निशिता पूजा का समय 12:04 AM से 12:47 AM, अगस्त 17
चांद निकलने का समय 11:32 PM
अष्टमी तिथि प्रारम्भ  अगस्त 15, 2025 को 11:49 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त अगस्त 16, 2025 को 09:34 PM बजे
रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत अगस्त 17, 2025 को 04:38 AM बजे
रोहिणी नक्षत्र का समापन अगस्त 18, 2025 को 03:17 AM बजे

जन्माष्टमी व्रत नियम (Janmashtami Vrat Niyam)

  • जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान कृष्ण की उपासना करनी चाहिए।
  • श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • इस व्रत में फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। 
  • दिन भर भगवान कृष्ण का मन ही मन ध्यान करते रहें।
  • रात में भगवान कृष्ण का अभिषेक किया जाता है।
  • इसके बाद आरती करके उन्हें भोग अर्पित किया जाता है। 
  • कई लोग रात 12 बजे के बाद अपना व्रत खोल लेते हैं तो वहीं कई अगले दिन यानी नवमी तिथि को व्रत का पारण करते हैं।

जन्माष्टमी व्रत का पारण कब किया जाता है (Janmashtami Vrat Ka Paran Kab Karte Hain)

जन्माष्टमी का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय पर तोड़ा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जन्माष्टमी का पारण सूर्योदय के बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के बाद किया जाना चाहिये। लेकिन अगर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक सूर्यास्त तक समाप्त नहीं होते तो पारण किसी एक के समाप्त होने के बाद कर लेना चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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