Jitiya Vrat 2026 Live: 3 अक्टूबर को रखा जाएगा जितिया व्रत, नोट कर लें पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी
जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं और शुभ मुहूर्त में विधि विधान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। यहां आप जानेंगे जितिया व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, कथा, मंत्र, आरती समेत सभी जरूरी बातें।

Jitiya Vrat 2026 Puja Vidhi, Muhurat, Katha, Aarti, Mantra Live Update: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। मुख्य रूप से यह पर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए 24 घंटे तक निर्जला व्रत रहती हैं। व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि पर नहाय खाय के साथ होती है और समाप्ति मातृ नवमी के दिन व्रत का पारण करके होती है। बता दें इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। जबकि 2 अक्टूबर को इस व्रत का नहाय खाय रहेगा। चलिए जानते हैं जितिया व्रत रखा कैसे जाता है और इस व्रत की पूजा विधि क्या है।
जितिया पूजन मुहूर्त 2026
- ब्रह्म मुहूर्त - 04:38 AM से 05:26 AM
- प्रातः सन्ध्या - 05:02 AM से 06:15 AM
- अभिजित मुहूर्त - 11:46 AM से 12:34 PM
- विजय मुहूर्त - 02:08 PM से 02:56 PM
- गोधूलि मुहूर्त - 06:05 PM से 06:29 PM
- सायाह्न सन्ध्या - 06:05 PM से 07:18 PM
जितिया व्रत की पूजा सामग्री
- गन्ना, कुशा, मौली, अक्षत, धुप, दीप, कर्पूर, घी, दूध, बांस की डलिया, जनेऊ, सिंदूर, रोली, जिउतिया का धागा, सेब, ऋतु फल, भीगे चने, फूल माला
- प्रसाद के लिए केला, बताशे या घर में बना हुआ प्रसाद जैसे, ठेकुआ, हलवा और पुए
- पान, सुपारी, दक्षिणा, खिलौने
- नेनुआ या तोरई के पत्ते
- जीमूतवाहन जी की प्रतिमा
- गोबर और मिट्टी से बनी सियारिन और चील की प्रतिमा
जितिया व्रत की पूजा विधि
- सबसे पहले भगवान गणेश को कुशा से जल छिड़ककर स्नान करवाएं।
- इसके बाद सियारिन, चील और जीमूतवाहन जी की प्रतिमा पर भी जल छिड़कें।
- फिर धूप-दीप जलाएं।
- सभी प्रतिमाओं को अक्षत और फूल अर्पित करें।
- इसके बाद भगवान गणेश, चील और सियारिन को सिंदूर अर्पित करें और भगवान जीमूतवाहन जी को कुमकुम और चंदन चढ़ाएं।
- इसके बाद पूजा में सभी प्रतिमाओं को वस्त्र रूपी मौली या कलावा अर्पित करें।
- इसके अलावा भगवान गणेश जी और जीमूतवाहन जी को जनेऊ अर्पित करें।
- भगवान जीमूतवाहन को सफेद रंग के फूलों की माला पहनाएं और भगवान गणेश को लाल या पीले रंग के फूल की माला पहनाएं।
- इसके बाद भगवान जी को भोग अर्पित करें।
- अगर आप चील और सियारिन की पूजा माता के स्वरूप में कर रहे हैं तो उन्हें श्रृंगार की सामग्री जरूर चढ़ाएं।
- विधि विधान पूजा करने के बाद कथा जरूर सुनें।
- अंत में आरती करके सभी में प्रसाद बांट दें।
- पूजा के बाद इस दिन महिलाएं अपने गले में जितिया का धागा पहनती हैं।
जितिया व्रत कथा 2026 (Jitiya Vrat Katha PDF)
एक समय की बात है, नर्मदा नदी के पास कंचनवटी नाम का एक नगर था। नदी की पश्चिम दिशा में मरुभूमि थी, जिसे बालुहटा के नाम से जाना जाता था। वहां एक विशाल पेड़ था, उसी पेड़ पर एक चील रहा करती थी। पेड़ के नीचे एक खोह (कोटर) थी, जिसमें सियारिन रहा करती थी। चील और सियारिन में गहरी दोस्ती थी। एक बार उन दोनों ने कुछ महिलाओं को जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत करते हुए देखा, जिसके बाद उन्हें भी यह व्रत करने की इच्छा हुई। दोनों ने यह व्रत करने का संकल्प लिया। लेकिन व्रत के दिन ही उस नगर के एक बड़े व्यापारी की मृत्यु हो गई और उसका दाह-संस्कार उसी स्थान पर किया गया, जहां चील और सियारिन रहती थीं।
रात में मौसम काफी खराब हो गया और एक बड़ा तूफान आ गया। दूसरी तरफ, सियारिन को बहुत तेज भूख लगने लगी और ऐसे में उसे व्यापारी का शव पड़ा हुआ मिल गया। उससे रहा नहीं गया और उसने व्यापारी का मांस खा लिया, जिसके कारण उसका व्रत टूट गया। लेकिन चील ने पूरे नियम और संयम के साथ यह व्रत रखा और अगले दिन पूरी श्रद्धा के साथ पारण किया।
मृत्यु के बाद अगले जन्म में दोनों ने एक ब्राह्मण के घर में दो बेटियों के रूप में जन्म लिया। चील बड़ी बहन बनी और उसका नाम शीलावती रखा गया, जबकि सियारिन छोटी बहन बनी और उसका नाम कपुरावती रखा गया। शीलावती, जो पिछले जन्म में चील थी, उसका विवाह बुद्धिसेन के साथ हुआ; वहीं कपुरावती का विवाह नगर के राजा मलयकेतु से हुआ। इस प्रकार कपुरावती नगर की रानी बन गई। भगवान जीमूतवाहन के आशीर्वाद से शीलावती के 7 पुत्र हुए, जबकि कपुरावती की जो भी संतानें हुईं, वे जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती थीं।
अपनी बहन शीलावती के जीवित पुत्रों को देखकर कपुरावती को ईर्ष्या होने लगी, जिसके चलते उसने राजा से कहकर शीलावती के सभी पुत्रों के सिर कटवा दिए। इसके बाद कपुरावती ने 7 थालियों में कटे हुए सिर रखकर और उन्हें लाल कपड़े से ढककर शीलावती के घर भिजवा दिया। जब भगवान जीमूतवाहन ने शीलावती के पुत्रों के शव देखे, तो उन्होंने मिट्टी से सिरों का निर्माण करके और सभी को धड़ों से जोड़कर उनमें दोबारा प्राण फूंक दिए, जिससे शीलावती के सातों पुत्र पुनः जीवित हो गए। दूसरी तरफ, रानी कपुरावती द्वारा भेजी गई थालियों में जो सिर रखे थे, वे फल बन गए।
रानी कपुरावती बड़ी बेसब्री से अपनी बहन के सातों पुत्रों की मृत्यु के समाचार का इंतजार कर रही थी। लेकिन जब उसे उनकी मृत्यु की कोई खबर नहीं मिली, तो वह खुद अपनी बहन के घर पहुंच गई। वहां जाकर उसने देखा कि उसके सारे भांजे तो जीवित और स्वस्थ हैं। यह देखकर उसके होश उड़ गए और वह बेहोश हो गई। जब उसे होश आया, तो उसने अपनी बहन को सारी बात बता दी और कपुरावती को अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ। भगवान जीमूतवाहन की कृपा से शीलावती को अपने पिछले जन्म की सारी बातें याद आ गईं, जिसके बाद वह अपनी बहन को उसी जगह ले गई जहां वे दोनों पिछले जन्म में रहती थीं।
वहां पहुंचकर शीलावती ने कपुरावती को पूर्वजन्म की पूरी कथा बताई। यह सब सुनने और सत्य जानने के बाद कपुरावती की मृत्यु हो गई। जब राजा को अपनी पत्नी की मृत्यु का समाचार मिला, तो उन्होंने उसी पेड़ के नीचे उसका दाह-संस्कार कर दिया जहाँ वह पिछले जन्म में रहा करती थी। इस प्रकार कपुरावती को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
Jitiya Vrat Katha PDF Download
Live updates : Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत कब है 3 या 4 अक्टूबर, जानें सही डेट, व्रत विधि, मुहूर्त और पारण समय
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October 02, 2026 11:04 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Moon Rise Time: जितिया व्रत के दिन चांद निकलने का समय
3 अक्टूबर जितिया व्रत के दिन चांद रात 11 बजकर 32 मिनट पर निकलेगा।
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October 02, 2026 10:17 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती
जय जय जय जितिया महारानी।
तुम हो सब जीवों की माता, हर लेती हो दुःख सब प्राणी।
जय जय जय जितिया महारानी।तुम्हारे व्रत से संतानें, निरोगी और लंबी उम्र पाएं।
सुख-समृद्धि का वास हो घर में, तुम ऐसी कृपा बरसाएं।
जय जय जय जितिया महारानी।जो नारी श्रद्धा से पूजे, तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
हर संकट से रक्षा करती, और भरती खुशियों का संसार।
जय जय जय जितिया महारानी।सत्यवादी राजा जीमूतवाहन की, महिमा है तुम से जुड़ी।
तुम्हारी कृपा से ही हुई, उस राजा की यश की घड़ी।
जय जय जय जितिया महारानी।तुम हो दुःखहर्ता, सुखकर्ता, तुम हो जीवन की दात्री।
तुम्हारी पूजा से पावन हो, हर घर की जननी और गात्री।
जय जय जय जितिया महारानी। -
October 02, 2026 9:39 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया धागे का महत्व
जितिया व्रत में जितिया धागे का विशेष महत्व होता है। यह धागा लाल रंग का होता है और पूजा में चील और सियारिन को यह धागा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, संतानों की संख्या के बराबर जितिया धागे चढ़ाए जाते हैं। माताएं अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने या चांदी के लॉकेट सहित जितिया अर्पित करती हैं। नवमी के दिन पारण के समय माताएं इस धागे को धारण कर लेती हैं।
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October 02, 2026 9:05 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat Mantra: संतान गोपाल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः
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October 02, 2026 8:24 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती
जितिया माता की आरती
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ओम जय कश्यप
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी.
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ओम जय कश्यप.
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली.
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ओम जय कश्यप
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी.
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ओम जय कश्यप
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा.
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ओम जय कश्यप
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी.
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ओम जय कश्यप
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै.
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ओम जय कश्यप
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन
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October 02, 2026 7:25 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया पर्व क्यों मनाया जाता है?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत रखने से संतानों को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि मिलती है। यह व्रत माता को संतान के वियोग और दुखों से बचाता है। यह सबसे कठिन निर्जला व्रतों में से एक माना जाता है।
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October 02, 2026 6:45 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत पूजन की तैयारी कैसे करें?
- पूजा करने की जगह को साफ-सुथरा कर लें और एक लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।
- चावल की मदद से कपड़े पर 8 पंखुड़ियों वाला कमल का फूल बना लें।
- अब उसी बने हुए कमल के ऊपर कलश रखें।
- कलश के अंदर साफ पानी, थोड़ा-सा गंगाजल, एक सुपारी, एक सिक्का और थोड़ी हल्दी डाल दें।
- कलश के मुंह पर आम के पत्ते लगाकर उसके ऊपर नारियल रख दें।
- नारियल पर कलावा लपेट दें और कलश पर सिंदूर या रोली से स्वास्तिक का निशान बना लें।
- तोरई के पत्तों पर गणेश जी, चील, सियारिन और राजा जीमूतवाहन जी की मूर्तियां या तस्वीरें स्थापित करें।
- सभी मूर्तियों को वस्त्र के रूप में कलावा चढ़ाएं।
- इसके बाद सभी को रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, फल-फूल और तोरई/नेनुआ के पत्ते का प्रसाद चढ़ाकर जितिया व्रत की कथा सुनें और आरती करें।
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October 02, 2026 5:54 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन क्या करना चाहिए?
- निर्जला व्रत रखना चाहिए।
- जीमूतवाहन की पूजा विधिपूर्वक करें।
- कथा जरूर सुनें।
- फूल, फल, प्रसाद, खिलौने और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- पूजा के अंत में भगवान जी को दक्षिणा अर्पित करें और आरती करें।
- गले में जितिया पहनें।
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October 02, 2026 5:16 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन क्या न करें?
इस दिन व्रती महिलाओं को अन्न, जल या फल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पूजा सामग्री या प्रसाद का अपमान न करें। व्रत कथा जरूर सुनें। पूजा पूरी किए बिना व्रत को अधूरा न छोड़ें। पारण से पहले किसी भी तरह का भोजन करना अशुभ माना जाता है।
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October 02, 2026 4:09 PM (IST) Posted by Arti Azad
Jitiya Vrat 2026: जितिया धागे का महत्व
जितिया व्रत में जितिया धागे का विशेष महत्व होता है। यह धागा लाल रंग का होता है और पूजा में चील और सियारिन को यह धागा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, संतानों की संख्या के बराबर जितिया धागे चढ़ाए जाते हैं। माताएं अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने या चांदी के लॉकेट सहित जितिया अर्पित करती हैं। नवमी के दिन पारण के समय माताएं इस धागे को धारण कर लेती हैं।
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October 02, 2026 2:40 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
जितिया व्रत की कहानी
जब वृद्धावस्था में जीमूत वाहन के पिता ने अपना सारा राजपाठ त्यागकर वानप्रस्थ आश्रम जाने का निर्णय लिया, तब जीमूत वाहन को राजा बनने में कोई रुचि नहीं थी। इसलिए उन्होंने अपने साम्राज्य को अपने भाइयों को सौंपकर अपने पिता की सेवा करने के लिए जंगल की ओर प्रस्थान किया। जीमूत वाहन का विवाह मलयवती नामक एक राजकन्या से हुआ। एक दिन, जीमूत वाहन जब जंगल में जा रहे थे तो उन्हें एक बूढ़ी महिला रोते हुए दिखी। जीमूतवाहन को पता चला कि वह नागवंश की स्त्री है। वृद्ध महिला ने आगे बताया कि नागों ने पक्षियों के राजा गरुण को रोजाना खाने के लिए नागों की बलि देने का वचन दिया है और इसी के कारण अब उसके बेटे शंखचूड़ की बारी है।
यह सुन जीमूत वाहन ने महिला को कहा कि वह स्वयं अपनी बलि दे देंगे। इसके बाद, जीमूत वाहन ने शंखचूड़ से लाल कपड़ा लिया और वह अपनी बलि देने के लिए चट्टान पर लेट गए। जब गरुण आए, तो उन्होंने लाल कपड़े में ढके जीव को देखा और वह उसे पहाड़ की ऊंचाई पर उठा ले गए। पंजों में जकड़े हुए जब पीड़ा के कारण जीमूतवाहन कराहने लगे और तब गरुड़ की उनपर नजर पड़ी और उन्होंने जीमूतवाहन से पूछा कि वह कौन हैं और नागों के स्थान पर वह क्या कर रहे हैं। इसके बाद जीमूतवाहन ने गरुड़ राज को पूरी बात बताई। जीमूत वाहन की बहादुरी और त्याग से गरुण प्रसन्न हुए।
इसके बाद गरुड़ राज ने न केवल जीमूत वाहन को जीवनदान दिया बल्कि यह भी प्रतिज्ञा ली कि वे आगे से नागों की बलि नहीं लेंगे। कहते हैं इसी घटना के बाद से जीमूत वाहन की पूजा की परंपरा शुरू हुई।
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October 02, 2026 2:13 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
जितिया व्रत कितने घंटे का होता है?
जितिया व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक रखा जाता है। इस तरह से ये पूरे 24 घंटे का व्रत होता है जो कि निर्जला रखा जाता है।
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October 02, 2026 1:25 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत कौन-कौन रख सकता है?
जितिया व्रत माताओं द्वारा उनकी संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं ये व्रत वे महिलाएं भी रख सकती हैं जिन्हें संतान प्राप्ति की इच्छा है।
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October 02, 2026 1:01 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में कुछ खा सकते है?
नहीं, जितिया व्रत में कुछ खाया नहीं जाता है। ये व्रत निर्जला रखा जाता है। हालांकि गर्भवती और बीमार महिलाओं को ये व्रत निर्जला नहीं रखना चाहिए।
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October 02, 2026 12:39 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
जितिया व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha Chilo Siyaro)
जितिया की पौराणिक कथा अनुसार किसी वन में एक चील और सियारिन रहती थी। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे हर काम को मिल-बांट के किया करती थीं। एक बार कुछ महिलाएं जंगल में आई जो जीवित्पुत्रिका व्रत की आपस में बात कर रही थीं। चील के मन में इस व्रत के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। वह महिलाओं के पास गई और उनसें व्रत के बारे में पूछने लगी। महिलाओं ने जितिया व्रत के विधान के बारे में चील को सारी जानकारी दी।
चील ने जाकर इस व्रत के बारे में अपनी मित्र सियारिन को बताया। जिसके बाद दोनों ने जितिया माता का व्रत और पूजन करने का निर्णय लिया। चील तथा सियारिन ने जितिया माता का व्रत का संकल्प लिया और शाम को पूजा की। लेकिन पूजा के बाद ही चील और सियारिन को भूख लगने लगी।
सियारिन को भूख बर्दास्त नहीं हुई और वह जंगल में शिकार करने चली गई। सियारिन जब मांस को खा रही थी, तब चील ने उसे देख लिया और उसने सियारिन की बहुत डांट लगाई। चील ने ये व्रत पूरी विधि से पूर्ण किया। फिर अगले जन्म में सियारिन और चील का जन्म बहन के रूप में, एक प्रतापी राजा के यहां हुआ। सियारिन का विवाह एक राजकुमार से हुआ और चील का विवाह राज्य मंत्री के पुत्र से हुआ।
कुछ समय बीता तो सियारिन ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन जन्म के कुछ दिन बाद ही उसके पुत्र की मृत्यु हो गई। इसके बाद चील ने भी एक पुत्र को जन्म दिया, जो जीवित तथा स्वास्थ्य रहा। यह देख सियारिन को अपनी बहन चील से ईर्ष्या होने लगी।
जलन में आकर सियारिन ने अपने बहन के पुत्र और पति को मरवाने की कोशिश की, परंतु दोनों ही बच गए। एक दिन देवी मां सियारिन के सपने में आई और उन्होंने सियारिन से कहा “यह तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्म का फल है, अगर तुम अपनी परिस्थिति ठीक करना चाहती हो तो मां जीतिया की व्रत और उपासना करो।
प्रातः काल उठकर इस सपने के बारे में सियारिन ने अपने पति को बताया। सियारिन के पति ने यह सुन सियारिन को ये व्रत करने के लिए कहा और उसकी बहन चील से माफी मांगने को बोला। इसके बाद सियारिन चील के घर गई और उससे अपने गलतियों की माफी मांगी। सियारिन को उसकी गलतियों पर पछतावा देखकर चील ने उसे माफ कर दिया।
अगले साल जब जितिया व्रत पड़ा तो ये व्रत सियारिन और उसकी बहन चील दोनों ने एक साथ रखा। माता जितिया ने प्रसन्न होकर सियारिन को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ दिनों बाद ही सियारिन ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया। इसके बाद दोनों बहन प्रेम भाव से खुशी-खुशी रहने लगी।
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October 02, 2026 12:15 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Jitiya Ke Gane (जितिया के गाने)
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
- अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
- तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
- अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
- तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
- जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
- रहीह तू हरदम सबका से आगे
- पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
- कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
- जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
- एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- हमरो उमर तोहरा के लग जाए
- रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
- पावन परब हम तोहरे ला करिले
- कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
- तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
- कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
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October 02, 2026 12:00 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत का पारण कब करेंगे?
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन सुबह सूर्योदय के बाद आप कभी भी व्रत खोल सकते हैं।
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October 02, 2026 11:45 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत में इस मंत्र का जरूर करें जाप
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः
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October 02, 2026 11:08 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
जितिया व्रत में नोनी का साग क्यों खाते हैं?
जितिया व्रत के नहाय-खाय के दिन नोनी का साग खाने की विशेष और प्राचीन परंपरा है, क्योंकि इसे बेहद पवित्र, स्वास्थ्यवर्धक और ऊर्जा देने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नोनी का साग अत्यंत शुद्ध और सात्विक माना गया है, जिसे व्रत की शुरुआत में खाना अनिवार्य माना जाता है।
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October 02, 2026 10:52 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Jitiya 2026 Live: जितिया व्रत में क्या बरतें सावधानियां
- जितिया के व्रत में लहसुन, प्याज और मांसाहार पूर्ण रूप से वर्जित होता है।
- व्रत करने के दौरान अपना मन, वचन और कर्म शुद्ध रखें।
- अगर गर्भवती महिला हैं तो यह व्रत ना करें। अगर रख भी रहे हैं तो कुछ न कुछ फलाहारी भोजन करते रहें।
- इसके अलावा जिन महिलाओं को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है उन्हें भी यह व्रत नहीं करने की सलाह दी जाती है।