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जितिया व्रत विधि 2026: जीवित्पुत्रिका व्रत कैसे रखा जाता है? जानें नहाए-खाय से पारण तक की संपूर्ण विधि स्टेप-बाय-स्टेप

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Oct 02, 2026 08:38 am IST,  Updated : Oct 02, 2026 08:44 am IST

जितिया व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं। इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। यहां आप जानेंगे जितिया व्रत की संपूर्ण विधि।

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जितिया व्रत विधि Image Source : INDIA TV

Jitiya Vrat Vidhi: जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतानों की लंबी उम्र के लिए 24 घंटे तक निर्जल व्रत रहती हैं। इस व्रत में एक गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। संतान की रक्षा के साथ-साथ यह व्रत संतान प्राप्ति की कामना के लिए भी रखा जाता है। पंचांग अनुसार इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल में रखा जाता है। यहां हम आपको बताएंगे जितिया व्रत रखने की सही विधि क्या है।

जितिया व्रत विधि

  • जितिया व्रत एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि से ही शुरू हो जाता है।
  • सप्तमी तिथि के दिन महिलाएं पवित्र नदी में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। 
  • इसके बाद सात्विक और हल्का भोजन ग्रहण करती हैं।
  • इस दिन विशेष रूप से नोनी का साग, नेनुआ की सब्जी और मडुआ की रोटी जैसे व्यंजन बनते हैं।
  • फिर अष्टमी तिथि पर यानी व्रत के मुख्य दिन पर निर्जला उपवास रखा जाता है। 
  • इस दिन महिलाएं अपने घर के पूजा स्थान के पास भगवान गणेश, जीमूतवाहन देवता, चील और सियारिन का चित्र स्थापित करके उनकी विधिवत पूजा करती हैं।
  • पूजा के समय ही जीमूतवाहन और चील-सियारन की कथा भी सुनी जाती है।
  • इस दिन अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • फिर व्रत के तीसरे दिन यानी नवमी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रती जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं। 
  • पारण के समय में मडुआ की रोटी, नोनी का साग और अन्य सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है।
  • इस बात का ध्यान रखें कि पारण से पहले किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर कुछ न कुछ दान अवश्य करें।
  • फिर अपना व्रत खोल लें। 
  • इसी दिन माताएं जितिया का धागा भी धारण करती हैं।

जितिया धागे का महत्व

इस पूजा में चील और सियारिन को जितिया का धागा अर्पित करना अनिवार्य माना जाता है। यह धागा लाल रंग का होता है, जिसमें गांठें लगी होती हैं। इस धागे में महिलाएं अपनी क्षमतानुसार सोने या चांदी से बना हुआ जितिया का लॉकेट डालकर अर्पित करती हैं। जिस महिला की जितनी संतान होती है वो लाल धागे में उतने ही जितिया लॉकेट डालती है। पूजा के बाद माताएं अपने गले में ये धागा धारण कर लेती हैं।

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