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Kamada Ekadashi Vrat Katha: कामदा एकादशी के दिन जरूर करें कथा का पाठ, भगवान विष्णु की बरसेगी कृपा

Kamada Ekadashi Vrat Katha: कामदा एकादशी का व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद भी आपको प्राप्त होता है।

Kamada Ekadashi Vrat Katha- India TV Hindi
Image Source : CANVA कामदा एकादशी व्रत कथा

Kamada Ekadashi Vrat Katha:कामदा एकादशी व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च को रखा जाएगा। कामदा एकादशी का व्रत रखने वालों को व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए, तभी व्रत का पूर्ण फल आपको प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कामदा एकादशी की व्रत कथा।

कामदा एकादशी व्रत कथा (Kamada Ekadashi Vrat Katha)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी की व्रत कथा गुरु वशिष्ठ जी ने भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप को सुनाई थी। कथा के अनुसार प्राचीन समय में भोगीपुर नाम का एक नगर था जहां पुण्डरीक नाम का एक राजा राज्य करता था। भोगीपुर में ही एक ललित और ललिता नाम के पति-पत्न भी निवास करते थे और पति-पत्नी के बीच गहरा प्रेम था। ललित राजा पुण्डरीक के दरबार में संगति सुनाता था। 

एक बार गंधर्वों के साथ ललित राज दरबार में संगीत सुना रहा था। गाना गाते वक्त उसका ध्यान अपनी पत्नी पर गया और ललित का सुर बिगड़ गया। राजा ने इसे अपना अपमान माना और राजा क्रोधित हो गया। क्रोध में आकर राजा ने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया। राजा के श्राप के प्रभाव से ललित मांस खाने लगा और उसका चेहरा भी राक्षसों के समान भयानक हो गया।  इसके बाद भी ललिता ने पति का साथ निभाया और वो लोगों से इसका उपाय पूछने लगी। दिन-ब-दिन पति का चेहरा और भी विकराल हो गया। 

एक दिन ललित जंगल की ओर गया तो पत्नी भी उसके पीछे चलने लगी। जंगल में ललिता को एक सुंदर आश्रम दिखा। ललिता उस आश्रम में गई और वहां जो मुनि थे उनको प्रणाम किया। ऋषि ने ललिता से पूछा कि तुम कौन हो। ललिता ने अपना नाम बताया और साथ ही अपने पति को मिले श्राप के बारे में भी बताया। दुखियारी ललिता को देखकर मुनि को तरस आ गया और उन्होंने ललिता को बताया कि इस समय चैत्र माह चल रहा है और चैत्र माह की एकादशी का व्रत रखने से और इसका पुण्य अपने पति को देने से वो ठीक हो सकता है।  

मुनि की बात को सुनकर विधि-विधान से ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी तिथि को व्रत का पारण मुनि के सामने किया। इसके साथ ही ललिता ने कामदा एकादशी का पुण्य फल अपने पति को दिया। व्रत के शुभ प्रभाव के कारण ललित धीरे-धीरे ठीक होने लगा। इसके बाद पति-पत्नी मिलकर एकादशी व्रत का पालन निरंतर करने लगे और उनके जीवन में खुशियां लौट आयीं। कामदा एकादशी का व्रत रखने वालों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं जैसे ललित के हुए और जीवन में खुशहाली आती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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