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कनिष्ठा उंगली पर त्रिकोण, वर्ग के साथ ही ये निशान होते हैं बेहद खास, हस्तरेखा शास्त्र में बताया है संकेत और महत्व

कनिष्ठा उंगली पर बनी रेखाओं और अलग-अलग चिह्नों का हस्तरेखा शास्त्र में खास महत्व बताया गया है। बड़ी रेखा और आड़ी रेखा से लेकर त्रिकोण, वर्ग और वृत्त जैसे निशानों के अलग-अलग फल बताए गए हैं। जानिए इन चिह्नों से जुड़ी मान्यताएं और संकेत।

hastrekha shastra, कनिष्ठा उंगली पर बने शुभ चिह्न- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV कनिष्ठा उंगली पर बने चिह्नों से जुड़ी मान्यता और संकेत

हस्तरेखा शास्त्र में उंगलियों पर बने हर निशान का अलग-अलग महत्व बताया गया है। कनिष्ठा यानी छोटी उंगली पर बनी रेखाओं और चिन्हों को भी व्यक्ति के स्वभाव और जीवन से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस उंगली पर बने निशान अलग-अलग संकेत देते हैं, जिसमें बड़ी रेखा, आड़ी रेखा, त्रिकोण, वर्ग और वृत्त जैसे चिन्ह शामिल हैं। तो चलिए जानते हैं कनिष्ठा उंगली पर बने इन निशानों के बारे में हस्तरेखा शास्त्र क्या कहता है।

बड़ी रेखा

यदि कनिष्ठा उंगली के तीनों पर्वों पर एक ही लंबी और सीधी खड़ी रेखा हो तो व्यक्ति को सत्यवादी और अच्छा वक्ता माना जाता है। अगर ऐसी दो रेखाएं हों तो व्यक्ति के सच्चे और उच्च चरित्र का संकेत माना जाता है। वहीं, मध्यमा उंगली पर बने शुभ चिह्नों के बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं। 

पहले पर्व पर छोटी-छोटी खड़ी रेखाएं हों तो व्यक्ति दूसरों के काम में हस्तक्षेप करता रहता है। कई बार वह ऐसे काम भी करने की योजना बनाता है, जिनका कोई खास मतलब नहीं होता। अगर हाथ में अच्छे लक्षण हों तो बातचीत और गुप्त विद्याओं के अध्ययन में विशेष दक्षता की मान्यता है।

दूसरे पर्व पर कई विचित्र रेखाएं हों तो व्यक्ति के दूसरों को धोखा देने की बात कही गई है। वहीं, दूसरे पर्व से शुरू होकर तीसरे पर्व के नीचे तक जाने वाली लंबी और स्पष्ट बड़ी रेखा वैज्ञानिक अनुसंधान में सफलता का संकेत मानी जाती है। अगर यह रेखा लहरदार हो तो व्यक्ति के चालाक होने की मान्यता है।

तीसरे पर्व पर कई विचित्र या लहरदार रेखाएं हों तो चोरी की प्रवृत्ति मानी जाती है। वहीं, एक छोटी और गहरी रेखा होने पर भी चोरी करने की प्रबल इच्छा का संकेत बताया गया है।

आड़ी रेखा

पहले पर्व पर छोटी-छोटी आड़ी रेखाएं हों तो व्यक्ति को बहुत बातूनी, मूर्ख और चोर बताया गया है। दूसरे पर्व पर ऐसी रेखाएं होने से व्यक्ति के कई तरह के काम करने या बार-बार कारोबार बदलने की बात कही गई है। तीसरे पर्व पर आड़ी रेखा होने पर चोरी की प्रवृत्ति का संकेत माना जाता है।

क्रॉस चिह्न

अगर कनिष्ठा के पहले पर्व पर क्रॉस का निशान हो और हाथ में शुभ लक्षण भी मौजूद हों, तो व्यक्ति में भविष्य का फलादेश करने की क्षमता मानी जाती है। वहीं, हाथ में अच्छे लक्षण न होने पर इसे चोरी या डकैती का संकेत बताया गया है। दूसरे पर्व पर क्रॉस चिह्न होने से व्यक्ति को कई तरह की कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यहां तक कि जेल जाने की भी मान्यता है। तीसरे पर्व पर क्रॉस का निशान चोरी करने का लक्षण माना गया है।

तारे का चिह्न

कनिष्ठा के पहले पर्व पर तारे का निशान हो तो द्रव्य कमाने में सफलता मिलने की मान्यता है। दूसरे पर्व पर तारे का चिह्न होने से चोरी, जालसाजी आदि के कारण बदनामी होने की बात कही गई है। वहीं, तीसरे पर्व पर तारे का निशान होने से व्यक्ति में वाक्पटुता और हाजिरजवाबी जैसे गुण होने की मान्यता है। हालांकि, तीसरे पर्व पर दो तारे के चिह्न हों तो चोरी के कारण अपमानजनक मृत्यु का संकेत बताया गया है।

त्रिकोण चिह्न

पहले पर्व पर त्रिकोण का चिह्न हो तो व्यक्ति की गुप्त विद्याओं में रुचि होने की मान्यता है। दूसरे पर्व पर त्रिकोण होने से गुप्त विद्याओं के अध्ययन और अभ्यास में सफलता मिलने की बात कही गई है। वहीं, तीसरे पर्व पर त्रिकोण का चिह्न होने से राजनीतिक कुशलता का संकेत माना जाता है।

वर्ग चिह्न

कनिष्ठा के पहले पर्व पर वर्ग का चिह्न हो तो व्यापार में धन लाभ होने की मान्यता है। दूसरे पर्व पर यह चिह्न होने से व्यक्ति के कई कामों में चतुर होने का बुध क्षेत्र से जुड़ा प्रभाव नहीं रहता। अगर हाथ में अन्य खराब लक्षण भी हों तो जेल यात्रा का संकेत माना जाता है। तीसरे पर्व पर वर्ग का चिह्न होने पर व्यक्ति के मन की बात कोई आसानी से नहीं जान पाता।

जाल चिह्न

पहले पर्व पर जाल का चिह्न हो तो व्यक्ति के मंत्र विद्या में निपुण होने की मान्यता है। हालांकि, हाथ में अन्य खराब लक्षण होने पर इसे झूठ बोलने और चोरी जैसे दुर्गुणों का संकेत माना जाता है। दूसरे पर्व पर जाल का चिह्न होने से व्यक्ति अपना कारोबार व्यवस्थित तरीके से नहीं करता। इसे जेल जाने के संकेत से भी जोड़ा गया है। तीसरे पर्व पर जाल का चिह्न अत्यंत मूर्खता का लक्षण माना जाता है।

वृत्त चिह्न

कनिष्ठा उंगली के तीसरे पर्व पर वृत्त का चिह्न होने से व्यक्ति के मन में चोरी करने की इच्छा होने की मान्यता है, लेकिन वह चोरी नहीं करता।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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