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Karwa Chauth Chand 2026: करवा चौथ का चांद कितने बजे निकलेगा और चांद की पूजा कैसे करनी है? जानिए सटीक जानकारी

करवा चौथ का व्रत रात में चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है। चंद्रोदय के बाद महिलाएं छलनी में दीपक रखकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और फिर अपने पति के हाथों से पानी पीकर अपना निर्जला व्रत पूरा करती हैं। चलिए जानते हैं करवा चौथ का चांद कब दिखेगा और इसकी पूजा विधि क्या है।

करवा चौथ चांद टाइमिंग और पूजा विधि- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV करवा चौथ चांद टाइमिंग और पूजा विधि

करवा चौथ का पावन पर्व आज यानी 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। शाम में महिलाएं करवा चौथ की विधि विधान पूजा करेंगी। बता दें पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:38 से 06:56 बजे तक रहेगा। पूजा के बाद चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाएगा। दरअसल यह व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण होता है। महिलाएं छलनी से चांद का दर्शन करके अर्घ्य अर्पित करती हैं। फिर उसी छलनी से अपनी पति का दीदार करके उनके हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। चलिए जानते हैं करवा चौथ का चांद कब निकलेगा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि क्या है।

करवा चौथ का चांद कब निकलेगा 2026

करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय का समय रात 08:17 बजे का है। हालांकि अलग-अलग शहरों के हिसाब से चांद निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। (देश के सभी प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय यहां जानें)

करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य की सही विधि

  • चंद्रोदय से पहले ही अपनी पूजा की थाली तैयार कर लें।
  • इस पूजा थाली में जल से भरा हुआ पीतल या तांबे का लोटा या फिर टोटी वाला करवा रखना है।
  • साथ ही थाली में एक छलनी, आटे या मिट्टी का दीपक, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई रखनी है। साथ ही पति के हाथों जल पीने के लिए एक छोटा गिलास भी रखना है।
  • चांद निकलने पर छलनी में घी का दीपक जलाएं।
  • फिर छलनी के माध्यम से चंद्र देव के दर्शन करें।
  • फिर एक लोटे में जल, थोड़ा सा दूध, अक्षत और पुष्प मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • फिर चंद्र देव को रोली-अक्षत अर्पित करें। साथ ही मिठाई का भोग लगाएं।
  • फिर चंद्र देव की आरती उतारें और अपनी जगह पर तीन बार घूमकर परिक्रमा करें।
  • इसके बाद चंद्र देव से अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।
  • चंद्रमा की पूजा के बाद उसी छलनी से अपने पतिदेव का चेहरा देखें।
  • फिर पति के चरणों को स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें।
  • इसके बाद पतिदेव के हाथों से जल पिलाएं और मिठाई खाकर अपना व्रत खोलें।
  • अंत में घर के सभी बड़ों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का जरूर करें जाप:

  • ॐ चंद्राय नमः
  • ॐ सोम सोमाय नमः

चंद्र देव की आरती

चांद की पूजा करने के बाद इस आरती को भी जरूर करें। इससे आपको चंद्र देव का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा।

  • ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
  • दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।।
  • रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
  • दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी।।
  • जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
  • सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।।
  • योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
  • ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा।।
  • वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
  • प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।।
  • शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
  • धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।।
  • विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
  • सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।।
  • ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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