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ketu Ke Shubh Phal: केतु क्रूर ग्रह होते हुए भी देता है शुभ फल, कुंडली के इन 4 भावों में हो अगर स्थित

Ketu Ke Shubh Phal: केतु ग्रह कुंडली के कुछ भावों में बैठकर बेहद शुभ परिणाम देता है। आज हम आपको इन्हीं भावों और इनमें बैठकर केतु कैसे परिणाम देता है इसके बारे में आपको बताएंगे।

Ketu Grah- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV केतु ग्रह

Ketu Ke Shubh Phal: केतु ग्रह को ज्योतिष में क्रूर ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि कुंडली के कुछ भावों में बैठकर केतु बेहद शुभ परिणाम व्यक्ति को देता है। केतु के शुभ प्रभावों के कारण व्यक्ति साहसी बनता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। साथ ही आध्यात्मिक क्षेत्र में भी व्यक्ति को अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि किन भावों में बैठा केतु शुभ फलदायक होता है। 

कुंडली का तृतीय भाव 

कुंडली का यह भाव साहस और पराक्रम का कारक होता है। इस भाव में केतु का बैठना बेहद शुभ माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में केतु तीसरे भाव में होता है वो लोग मेहनती होते हैं। ऐसे लोग परिश्रम करने से कभी पीछे नहीं हटते। ऐसे लोग शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाते है। निडरता इनके स्वभाव में बचपन से ही देखने को मिल सकती है। 

कुंडली का छठा भाव

केतु कुंडली के छठे भाव में भी शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है। ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत अच्छी होती है। साथ ही ऐसे लोग अच्छे वक्ता भी हो सकते हैं। इन लोगों को पारिवारिक जीवन में भी सुखद फलों की प्राप्ति होती है। 

कुंडली का नवम भाव

कुंडली के नवम भाव को धर्म और भाग्य का कारक माना जाता है। इस भाव में बैठा केतु व्यक्ति को आध्यात्मिक क्षेत्र में सफल बना सकता है। ऐसे लोगों की रुचि धर्म-अध्यात्म को जानने में हो सकती है। ऐसे लोग दार्शनिक होते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में भी उपलब्धियां प्राप्त करते हैं। अच्छा गुरु बनने की भी इनमें सभी खूबियां होती हैं। यात्राओं से इनको लाभ मिलता है। 

कुंडली का द्वादश भाव

कुंडली के द्वादश भाव को मोक्ष और अध्यात्म का कारक माना जाता है। इस भाव में केतु का बैठना बेहद सुखद होता है। जिन लोगों की कुंडली में द्वादश भाव में केतु होता है उनको विदेशों में और विदेशों से जुड़े कारोबार में सफलता प्राप्त हो सकती है। ऐसे लोग गुप्त विद्याओं में भी माहिर हो सकते हैं। साथ ही द्वादश भाव का केतु व्यक्ति को विरक्त भी बना सकता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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