कुंडली में ग्रहों की युति, दृष्टि आदि से कई तरह के राजयोगों का निर्माण होता है। हालांकि कई बार कुंडली में राजयोग होते हुए भी व्यक्ति को उसके शुभ परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि राजयोग होते हुए भी इसका शुभ फल कई बार क्यों नहीं मिलता और राजयोग के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए।
षड्बल में कमजोर ग्रह
अगर कोई ग्रह कुंडली में राजयोग का निर्माण कर रहा है लेकिन षड्बल में इसकी स्थिति कमजोर है तो राजयोग का शुभ फल वह ग्रह नहीं दे पाएगा।
राजयोग का बुरी दृष्टि के कारण भंग होना
अगर कुंडली में कोई ग्रह राजयोग बना रहा है लेकिन उस पर राहु-केतु या शनि जैसे क्रूर ग्रह की दृष्टि है तो राजयोग का शुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है।
त्रिक भाव के स्वामियों के साथ युति
त्रिक भाव यानि 6, 8 और 12 वें भाव। इन भावों के स्वामी के साथ यदि राजयोग बनाने वाले ग्रह का संबंध हो तब भी राजयोग का शुभ परिणाम व्यक्ति को प्राप्त नहीं होता।
अनुकूल दशा का न होना
राजयोग बनाने वाला ग्रह तभी अच्छे परिणाम देता है जब उसकी दशा या अंतर्दशा हो। अगर दशा-अंतर्दशा राजयोग बनाने वाले ग्रह की नहीं है तो राजयोग का प्रभाव देखने को नहीं मिलता।
ग्रहों का कमजोर होना
अगर राजयोग बनाने वाले ग्रह नीच राशि में हों, अस्त हों तब भी राजयोग के शुभ परिणाम व्यक्ति को नहीं मिलते।
कैसे पाएं राजयोग का शुभ परिणाम?
- कुंडली में अगर सूर्य, गुरु, केतु राजयोग कारक हैं तो भगवान विष्णु की आराधना करने से प्रतिकूल होने पर भी शुभ परिणाम दे सकते हैं।
- कुंडली में शनि, राहु, चंद्रमा अगर राजयोग कारक हों तो भगवान शिव की पूजा व्यक्ति को करनी चाहिए। ऐसा करने से राजयोग का शुभ परिणाम प्राप्त हो सकता है।
- अगर मंगल राजयोग बना रहा हो तो हनुमान जी की आराधना करने से शुभ फल मिल सकते हैं।
- शुक्र अगर कुंडली में राजयोग कारक है तो व्यक्ति को माता लक्ष्मी की पूजा करने से लाभ मिल सकता है।
- बुध अगर कुंडली में राजयोग कारक है तो व्यक्ति को भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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