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कुशाग्रहणी अमावस्या 2026 कब है? इस दिन क्यों घर लाई जाती है सालभर की कुशा, जानें सटीक तारीख और महत्व

कुशाग्रहणी अमावस्या पर साल भर के धार्मिक कार्यों के लिए कुशा एकत्र करने की परंपरा है। इस दिन पितरों के तर्पण, स्नान-दान और पूजा-पाठ का भी खास महत्व है। जानिए किस दिन मनाई जाएगी कुशाग्रहणी अमावस्या, इसका धार्मिक महत्व, कुशा से जुड़े नियम।

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Image Source : PINTEREST कुशाग्रहणी अमावस्या 2026 कब है?

भाद्रपद मास की अमावस्या बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन स्नान-दान, पितृ तर्पण और पूजा-पाठ के साथ पवित्र कुशा ग्रहण करने की भी परंपरा है। सालभर होने वाले श्राद्ध कर्म, हवन, यज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में कुशा का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से भाद्रपद माह की अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह अमावस्या किस दिन पड़ रही है, इस दिन कुशा क्यों एकत्र की जाती है? आइए जानते हैं।

कुशाग्रहणी अमावस्या कब है?

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पिठोरी अमावस्या यानी कुशाग्रहणी अमावस्या 11 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह करीब 10 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 11 सितंबर को सुबह करीब 8 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। अलग-अलग स्थान और पंचांग की गणना पद्धति के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

कुशा का क्या महत्व है?

सनातन धर्म की परंपराओं में कुशा को पवित्र माना गया है। मान्यता है कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मंत्रोच्चार के साथ कुशा ग्रहण करने की परंपरा है। इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्राप्त की गई कुशा का इस्तेमाल सालभर पितृकर्म और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।

ग्रहण में भी होता है कुशा का प्रयोग

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय भी कुशा का इस्तेमाल किया जाता है। मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान खाद्य पदार्थों और दूध आदि में कुशा रखने से उनकी शुद्धता बनाए रखने में मदद मिलती है। यही वजह है कि धार्मिक कार्यों में कुशा को विशेष स्थान दिया गया है।

अमावस्या पर क्या करें?

इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। अपनी श्रद्धा के अनुसार सूर्य देव को जल अर्पित करें और पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा से किए गए तर्पण, सेवा और दान से पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। जिन परिवारों में पिठोरी व्रत की परंपरा है, वहां संतान की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना से व्रत और पूजा की जाती है।

कुशाग्रहणी अमावस्या उपाय

पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर प्रार्थना की जा सकती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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