28 अगस्त को रक्षाबंधन और चंद्रग्रहण दोनों एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे में हर किसी के मन में ये सवाल आ रहा है कि क्या चंद्र ग्रहण के साये में रक्षाबंधन मनाना सही रहेगा? दरअसल ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि धार्मिक दृष्टि से ग्रहण एक अशुभ घटना मानी जाती है। इसी वजह से इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते और न ही कोई तीज-त्योहार मनाया जाता। अगर किसी पर्व के मुहूर्त पर ग्रहण का साया पड़ गया, तो उस त्योहार की टाइमिंग या डेट तक में बदलाव कर दिया जाता है। तो क्या रक्षाबंधन के त्योहार के साथ भी ऐसा ही होगा? यहां हम आपकी इसी दुविधा को दूर करेंगे।
धर्म-शास्त्रों और ज्योतिष की राय
सबसे पहले तो यहां हमें यह जानना जरूरी है कि ग्रहण को लेकर धर्म शास्त्रों में क्या नियम बताए गए हैं। क्या दुनिया के किसी भी कोने में लगे ग्रहण का भी हमारे ऊपर प्रभाव पड़ता है? तो जवाब है नहीं। धर्म-शास्त्रों और मशहूर ज्योतिष सुजित जी महाराज अनुसार, सिर्फ उसी ग्रहण का धार्मिक महत्व माना जाता है जो ग्रहण अपने देश या क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे। ऐसा ग्रहण जो अपने यहां दिखाई नहीं दे रहा है उसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं होता। इसका मतलब है कि इस तरह का ग्रहण त्योहार को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करता।
रक्षाबंधन पर ग्रहण का नहीं पड़ेगा असर
28 अगस्त 2026 को जो चंद्रग्रहण लग रहा है वो भारत में दिखाई नहीं दे रहा है। जिस कारण से इस ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों को करने पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं होगी। बहन-भाई बिना किसी रुकावट के रक्षाबंधन का त्योहार मना सकेंगे और पंचांग में जो राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दिया गया है उसी मुहूर्त में राखी बांधी जा सकेगी।
शुभ मुहूर्त में बहनें भाइयों को बांध सकेंगी राखी
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 की सुबह 8 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसी बीच रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त भी रहेगा। जो सुबह 05:57 से शुरू होकर 09:48 बजे तक रहेगा। ज्योतिष अनुसार बहनें इसी शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी क्योंकि ग्रहण का इस त्योहार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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