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क्या होता है केमद्रुम योग, ज्योतिष में क्यों माना जाता है इसे अशुभ?

केमद्रुम योग को ज्योतिष के अशुभ योगों में से एक माना जाता है। यह योग चंद्रमा की स्थिति के चलते बनता है और इसके बनने से चुनौतियां जीवन में आ सकती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इस योग के बारे में।

Kemdrum Yog- India TV Hindi
Image Source : CANVA केमद्रुम योग

केमद्रुम योग को ज्योतिष के अशुभ योगों में से एक माना जाता है। यह योग चंद्रमा की कुंडली में स्थिति के चतलते बनता है। इस दुर्योग के बनने से व्यक्ति को जीवन में मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यह योग बनता कैसे है और किन उपायों को करने से इसके अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 

केमद्रुम योग कैसे बनता है? 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा अकेला बैठा हो और इसके आगे और पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो और ना ही इसके साथ कोई ग्रह बैठा हो तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है। आप ऊपर दी गई तस्वीर में देख सकते हैं कि चंद्रमा वृश्चिक राशि में अकेला बैठा है और इसका पीछे वाला भाव यानि तुला राशि और आगे वाला भाव यानि धनु राशि में कोई भी ग्रह नहीं है। इसके साथ ही कोई ग्रह चंद्रमा के साथ बैठा भी नहीं है। इसलिए कुंडली में केमद्रुम योग बन रहा है। इस योग का जीवन पर क्या प्रभाव देखने को मिलता है आइए जानते हैं। 

केमद्रुम योग का प्रभाव 

चंद्रमा के आगे-पीछे और साथ में कोई भी ग्रह नहीं होता तो चंद्रमा अनियंत्रित हो जाता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है और जब ये कुंडली में बिल्कुल अकेला पड़ जाता है, किसी अन्य ग्रह का बल या सहारा इसे नहीं मिलता तो मन अनियंत्रित हो सकता है। जिन लोगों की कुंडली में यह योग बनता है वो विचलित हो सकते हैं और मन के भटकाव के कारण जीवन में असफल भी हो सकते हैं। ऐसे लोगों को मानसिक पीड़ा हो सकती है और अत्यधिक सोचने वाले भी ऐसे जातक हो सकते हैं। आर्थिक पक्ष के लिए भी इस योग का बनना अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे लोगों को जीवन में बार-बार उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ सकता है। केमद्रुम योग के चलते कुंडली में मौजूद अन्य शुभ योगों का असर भी खत्म हो सकता है। 

किन स्थितियों में केमद्रुम योग का बुरा प्रभाव दूर हो सकता है? 

अगर कुंडली में किसी शुभ ग्रह जैसे गुरु, शुक्र, बुध की दृष्टि अकेले पड़ चुके चंद्रमा पर पड़ती है तो केमद्रुम योग का बुरा प्रभाव काफी हद तक दूर हो सकता है। ऊपर दी गई तस्वीर में गुरु की पंचम दृष्टि चंद्रमा पर है ऐसे में चंद्रमा की नीचता को गुरु ने भंग कर दिया है। इसलिए केमद्रुम योग होने के बावजूद भी व्यक्ति को शुभ परिणाम मिल सकते हैं क्योंकि गुरु की शुभ दृष्टि चंद्रमा को संभाल लेगी। 

केमद्रुम योग के बुरे प्रभावों से बचने के उपाय

  • जिन भी लोगों की कुंडली में केमद्रुम योग बनता है उनको भगवान शिव की निरंतर उपासना करनी चाहिए। शिव उपासना और शिव मंत्रों का जप करने से केमद्रुम योग का बुरा प्रभाव दूर हो जाता है। 
  • ऐसे लोगों को शिवरात्रि, नाग पंचमी, सावन सोमवार के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। ऐसा करने से भी केमद्रुम योग निष्प्रभावी हो जाता है। 
  • योग्य ज्योतिष की सलाह पर ऐसे लोगों को रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष धारण करने से भी केमद्रुम योग के बुरे प्रभाव दूर हो सकते हैं। 
  • केमद्रुम योग के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए प्रतिदिन चंद्र ग्रह के बीज मंत्र 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः' का जप करना चाहिए। 
  • इसके साथ ही प्राणायाम, ध्यान करने से भी ऐसे लोगों की मानसिक शक्ति बढ़ती है और कुंडली में केमद्रुम योग होने के बावजूद भी शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। 
  • जिन लोगों की कुंडली में केमद्रुम योग बनता है उन्हें किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लेनी चाहिए और जरूरी उपाय जीवन में अपनाने चाहिए। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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