माता काली और कालरात्रि भले ही आदिशक्ति का ही रूप हों लेकिन ये दोनों देवियां एक नहीं हैं। आदिशक्ति के इन दोनों स्वरूपों के बीच कई ऐसे अंतर हैं जो स्पष्ट रूप से इन्हें एक दूसरे से अलग बनाते हैं। अगर आप भी माता काली और कालरात्रि को लेकर संशय की स्थिति में थे तो अब स्पष्ट हो जाएं कि ये दोनों एक नहीं हैं। इन दोनों देवियों के बीच क्या-क्या अंतर हैं आइए जानते हैं।
पहला अंतर
माता काली दस महाविद्याओं में से एक हैं और सबसे पहली महाविद्या हैं। वहीं माता कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं जिनकी पूजा नवरात्रि में सप्तमी तिथि पर की जाती है।
दूसरा अंतर
माता कालरात्रि की सवारी गधा है जबकि माता काली का वाहन श्मशानवासी प्रेत माना जाता है।
तीसरा अंतर
माता कालरात्रि के बाल बिखरे और खुले हुए होते हैं, माता चार भुजाओं वाली हैं और इनके हाथों में तलवार, वज्र, अभयमुद्रा और वरमुद्रा धारण हैं। वहीं माता काली के हाथों में खप्पर, तलवार और कटा हुआ सिर रहता है।
चौथा अंतर
माता काली के गले में मुण्डमाला (कटे हुए सिरों की माला) होती है जबकि माता कालरात्रि के गले में विद्युत की माला है।
पांचवां अंतर
माता काली अहंकार से मुक्ति दिलाने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। वहीं माता कालरात्रि भक्तों को भय, रोग-दोष से मुक्त करती हैं।
छठा अंतर
माता काली की पूजा तांत्रिक विधि और गुप्त साधनाओं के लिए की जाती है। माता कालरात्रि की पूजा नवरात्रि में सामान्य रूप से भक्तों के द्वारा की जाती है।
सातवां अंतर
माता काली का स्वरूप विकराल है और उनकी जीभ बाहर निकली हुई है। वहीं माता कालरात्रि के तीन नेत्र हैं जो ब्रह्मांड की तरह गोल आकार के दिखाई देते हैं, माता कालरात्रि की जीभ बाहर नहीं निकली होती।
ऊपर दिए गए बिंदुओं से आप जान गए होंगे कि माता काली और कालरात्रि दोनों ही अलग हैं। दोनों का स्वरूप अलग है, दोनों की पूजा के उद्देश्य अलग हैं। हालांकि, दोनों देवियों के बीच समानता यह है कि आदिशक्ति का रौद्र रूप होने के बावजूद भी ये अपने भक्तों के लिए सदा शुभकारी होती हैं, भक्तों पर इन दोनों की ही कृपा दृष्टि बनी रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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