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Makar Sankranti Katha: शनि और सूर्य का मकर संक्रांति से क्या है संबंध, जानने के लिए पढ़ें मकर संक्रांति की पौराणिक कथा

Makar Sankranti Katha 2026: मकर संक्रांति का पर्व इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। इसलिए इस शुभ अवसर पर सूर्य-शनि की पौराणिक कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

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Image Source : CANVA मकर संक्रांति की कथा

Makar Sankranti Katha 2026: मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव और शनि देव यानी पिता-पुत्र का दिव्य मिलन होता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का दिन बेहद खास होता है। इस बार मकर संक्रांति का त्योहार 14 और 15 दोनों दिन मनाया जा रहा है। लेकिन अधिकतर लोग इस पर्व को 15 जनवरी को ही मनाएंगे। इस दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजे तक रहेगा। यहां हम आपको बताएंगे मकर संक्रांति के दिन कौन सी कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

मकर संक्रांति कथा (Makar Sankranti Katha)

मकर संक्रांति की कथा सूर्य देव और उनके पुत्र शनि से जुड़ी है। कथा के अनुसार सूर्यदेव की दो पत्नियां हैं। एक का नाम छाया है तो दूसरी का नाम संज्ञा। जब संज्ञा का सूर्य देव से विवाह हुआ तो वे सूर्य का तेज सहन नहीं कर पाती थीं जिसके समाधान के लिए वह अपनी छाया को सूर्य के पास छोड़कर तपस्या के लिए वन चली गईं। छाया से सूर्य देव को जिस पुत्र की प्राप्ति हुई उसका नाम शनि रखा गया है। इसके बाद संज्ञा से धर्म और न्याय के देवता यमराज का जन्म हुआ।

समय के साथ-साथ शनि और सूर्य भगवान के संबंधों में खटास आने लगी जिसका कारण था सूर्य देव का छाया से बुरा व्यवहार। दरअसल, शनि देव का रंग गहरा था जिस कारण सूर्य देव ने अपनी दूसरी पत्नी छाया को शनि का त्याग करने के लिए कह दिया था। लेकिन छाया अपने पुत्र शनि से बहुत प्रेम करती थीं इसलिए उन्होंने सूर्य देव की बात नहीं मानी जिस कारण सूर्य देव उनका अक्सर अपमान करते रहते थे। कुछ समय बाद छाया ने शनि को कुंभ नाम का घर दिया जहां शनि अपनी मां छाया के साथ रहने लगे।

एक दिन सूर्य देव के बुरे व्यवहार से क्रोधित होकर शनि ने उन्हें कुष्ठ रोग का शाप दे दिया। जिसके कारण सूर्य देव का तेज कम होने लगेगा और वो धीरे-धीरे काले पड़ने लगे। क्रोध में आकर सूर्य देव ने शनि का घर जला दिया। यह देखकर शनि के भाई यमराज को बहुत दुख हुआ और उन्होंने अपने पिता सूर्य देव को समझाया। जिसके बाद सूर्य देव का गुस्सा शांत हुआ और वे शनि के पास पहुंचे। जब सूर्य देव शनि के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि शनि का घर बुरी तरह से जल चुका है। उस समय शनि के पास सिर्फ काले तिल ही उपलब्ध थे जिससे उन्होंने अपने पिता सूर्य देव की अराधना की। शनि का यह विनम्र भाव देखकर सूर्य देव का हृदय पिघल गया और उन्होंने शनि को एक नया घर दिया जिसका नाम मकर था। कहते हैं इसके बाद से ही शनिदेव कुंभ और मकर राशियों के स्वामी हो गए।

शनि को नया घर देते समय सूर्यदेव ने ये भी कहा कि जब भी मैं तुम्हारे दूसरे घर यानी मकर राशि में प्रवेश करूंगा तब धन, अन्न और समृद्धि का संचार होगा और इससे सभी कष्ट दूर होंगे। कहते हैं तिल के कारण ही शनि देव के जीवन में खुशहाली और समृद्धि आई। साथ ही उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ। इसी वजह से मकर संक्रांति के दिन तिल से सूर्य और शनि की पूजा करना, साथ ही इस दिन तिल से स्नान और तिल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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