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Malmas 2026: मलमास क्या सच में है 'मलिन' या अपवित्र महीना? यहां करें सारी कन्यफ्यूजन दूर

Malmas 2026: मलमास 2026 की शुरुआत 17 मई से शुरू हो चुकी है। इस माह को लेकर लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि क्या ये महीना अपवित्र है जिस वजह से इस माह में शादी-मुंडन जैसे कार्य नहीं होते। अगर आपके मन में भी ये प्रश्न उठता है तो आज इसका सटीक जवाब आपको हमारे लेख मे मिलेगा।

Malmas 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मलमास 2026

Malmas 2026: मलमास को हिंदू धर्म में अधिकमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मलमास के शुरू होते ही मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे कार्यों पर रोक लग जाती है। वहीं कुछ लोग तो इस दौरान कपड़े तक भी नहीं खरीदते। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिरी मलमास को मल यानि मलिन क्यों कहते हैं, क्या सच में ये अपवित्र महीना है? आज इसी उलझन को हम अपने इस लेख में दूर करेंगे। 

मलमास क्या सच में है अपवित्र माह? 

मलमास सच में अपवित्र महीना है या नहीं इसका पता हम ज्योतिष और पौराणिक ग्रंथों की मदद से जानने की कोशिश करेंगे। 

सबसे पहले आपका ये जानना जरूरी कि मलमास में जो 'मल' है उसका अर्थ मलिन या अपवित्र नहीं है। इसका अर्थ है अभाव। दरअसल सौर वर्ष में 365 दिन होते हैं जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। ऐसे में सौर और चंद्र वर्ष में 11 दिनों का अंतर बन जाता है। इसलिए सौर और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को मिटाने के लिए चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त माह हर 3 साल में एक बार जोड़ा जाता है जिसे मलमाल या अधिक मास कहा जाता है। इस अधिक मास में एक बार भी सूर्य संक्रांति नहीं आती यानि संक्रांति का 'मल' अभाव रहता है और इसीलिए इस अधिक मास को मलमास भी कहा जाता है। मलमास खगोलीय रूप से गणना को शुद्ध करने का महीना है न कि अपवित्र महीना। 

मलमास अपवित्र नहीं है तो इस माह में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?

मलमास में शादी, विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। इन शुभ कार्यों के लिए सूर्य और गुरु ग्रह का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है लेकिन मलमास में कोई संक्रांति नहीं होती इस वजह से सांसारिक शुभ कार्यों को फलीभूत करने की ऊर्जा इस महीने में नहीं होती। यही वजह है कि इस माह में सांसारिक और भौतिक कार्यों को करना वर्जित होता है लेकिन आध्यात्मिक और धार्मिक कार्य इस दौरान करना शुभ होता है। 

मलमास को क्यों कहते हैं पुरुषोत्तम मास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास को उपहास मिलन कहकर उड़ाया जाता था। इसलिए एक बार भगवान विष्णु के पास मलमास अपनी व्यथा लेकर गया। तब भगवान विष्णु ने इस माह को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया और खुद को इस माह का स्वामी बनाया। इसलिए मलमास में विष्णु उपासना करना और आध्यात्मिक कार्य करना बेहद शुभ माना जाता है। 

अब आप की कन्फ्यूजन दूर हो गई होगी कि मलमास अपवित्र महीना नहीं है बल्कि कुछ ज्योतिषीय कारणों से इस माह में शुभ कार्य नहीं होते। हालांकि धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह माह बेहद शुभ माना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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