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Navratri Maa Durga Stuti: इन मंत्रों और स्तुति के साथ करें मां दुर्गा की आराधना, बरसेगी विशेष कृपा, दूर होंगे सारे संकट

नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना की जाती है। विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने के साथ ही दुर्गा स्तुति और मंत्र का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। तो नवरात्रि में दुर्गा स्तुति का पाठ अवश्य करें।

मां दुर्गा की स्तुति- India TV Hindi
Image Source : PEXELS मां दुर्गा की स्तुति

माता दुर्गा की उपासना के लिए नवरात्रि का समय सबसे उत्तम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि में मां दुर्गा पृथ्वी लोक पर आती हैं और अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर उनपर अपार कृपा बरसाती हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक जगत जननी मां भगवती की आराधना करने से जातक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और उनके हर संकट शीघ्र दूर हो जाते हैं। नवरात्रि में इस स्तुति का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। स्तुति का पाठ करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं। बता दें कि इस साल शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर को और समाप्त 20 अक्टूबर 2026 को होगा।

श्री दुर्गा स्तुति (Shri Durga Stuti Path)

जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां ।
उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।

हे महालक्ष्मी हे महामाया,
तुम में सारा जगत समाया ।
तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।

हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
सारे काज संवारिणी मां ।
जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां

शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
चंद्रघंटा कूष्मांडा मां ।
स्कंदमाता कात्यायनी माता,
शरण तुम्हारी सारा जहां।।

कालरात्रि महागौरी तुम हो
सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मां

अजा अनादि अनेका एका,
आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
गावहिं सदा देव मुनि संता।।

अपने साधक सेवक जन पर,
सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
जय जगजननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां।।

दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी मां,
जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी मां।।

मां दुर्गा पूजा मंत्र

  1. सर्व मंगल मांगल्य शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
  2. या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

मां दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी,
तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा,
अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता ।
सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित,
वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत,
कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति,
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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