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नवरात्रि हवन विधि मंत्र सहित PDF: अष्टमी-नवमी पर खुद कैसे करें हवन? जानिए सही मंत्र, संपूर्ण सामग्री और स्टेप-बाय-स्टेप विधि

नवरात्रि की अष्टमी-नवमी को हवन पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इसे चंडी हवन के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इस हवन को करने की विधि क्या है यहां हम इस बारे में आपको विस्तार से बताएंगे।

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Image Source : INDIA TV नवरात्रि हवन विधि मंत्र सहित

Navratri Havan Vidhi With Mantra: नवरात्रि की महाअष्टमी और महानवमी के पावन अवसर पर हवन करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस साल कुछ लोग 18 अक्टूबर तो कुछ 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाएंगे, वहीं महा नवमी का पर्व मुख्य रूप से 19 और 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यदि आप इस बार बिना पंडित के घर पर ही हवन करने की सोच रहे हैं, तो नीचे दी गई सरल विधि, मंत्रों और सही मुहूर्तों के अनुसार आप इस पूजन को पूर्ण कर सकते हैं। जानिए गोरखपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से हवन करने की सरल विधि।

नवरात्रि हवन मुहूर्त 2026

  • 18 अक्टूबर 2026, रविवार - सुबह 08:27 मिनट से शाम 05:47 तक
  • 19 अक्टूबर 2026, सोमवार - सुबह 10:51 AM से शाम 05:48 PM तक
  • 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार - सुबह 06:25 AM से दोपहर 12:50 PM तक

नवरात्रि हवन सामग्री 

हवन कुंड, सूखी आम की लकड़ियां, कपूर, रोली, अक्षत, कलावा, रक्षासूत्र, हवन सामग्री पैकेट, जौ, तिल, शक्कर, देसी घी, सूखा गोला, पंचमेवा, बताशे, लौंग का जोड़ा, छोटी इलायची, हरी दूर्वा और पान का पत्ता।

नवरात्रि हवन विधि मंत्र सहित

  • हवन कुंड को ईशान कोण या पूर्व दिशा में रखें। हवन शुरू करने से पहले धरती माता का ध्यान करें और फिर अपने हाथों को स्वच्छ करें और उसमें तीन बार जल लेकर नीचे दिए मन्त्रों का उच्चारण करते हुये आचमन करें: ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः
  • इसके बाद एक दीपक जलाकर अग्निदेव का आवाहन करें। फिर दायें हाथ में जल लेकर इस मन्त्र को बोलते हुए 'भूलोके धर्म स्थापनार्थम् सर्वेषाम् जनानाम् सुख शान्ति सिद्ध्यर्थम् दुर्गा होमकर्म यथाशक्ति करिष्ये' जल को भूमि पर छोड़ दें।
  • फिर हवन कुण्ड में सूखे नारियल के टुकड़े, लकड़ी और उपले डालें। अब कपूर की मदद से इस मन्त्र को बोलते हुये 'ॐ भूर्भुवस्सुवरोम्।' अग्नि प्रज्वलित करें।

फिर हवन में इन मंत्रों से दें घी की आहुति

  • ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये न मम।
  • ॐ इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय न मम।
  • ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये न मम।
  • ॐ सोमाय स्वाहा। इदं सोमाय न मम।
  • ॐ भूः स्वाहा। इदं अग्नेय न मम।
  • ॐ भुवः स्वाहा। इदं वायवे न मम।
  • ॐ स्वः स्वाहा। इदं सूर्याय न मम।
  • ॐ ब्रह्मणे स्वाहा। इदं ब्रह्मणे न मम।
  • ॐ विष्णवे स्वाहा। इदं विष्णवे न मम।
  • ॐ श्रियै स्वाहा। इदं श्रियै न मम।
  • ॐ षोडश मातृभ्यो स्वाहा। इदं मातृभ्यः न मम॥

इसके बाद नवग्रह के नाम या मंत्र को बोलते हुए हवन सामग्री से आहुति दें - यदि हवन 1 से अधिक लोग कर रहे हैं तो 1 सदस्य घी की आहुति दे, बाकी सदस्य हवन सामग्री से आहुति दें। 

  • ॐ सूर्याय नमः स्वाहा   
  • ॐ चंद्रमसे नमः स्वाहा   
  • ॐ भौमाय नमः स्वाहा   
  • ॐ बुधाय नमः स्वाहा   
  • ॐ गुरवे नमः स्वाहा  
  • ॐ शुक्राय नमः स्वाहा   
  • ॐ शनये नमः स्वाहा   
  • ॐ राहवे नमः स्वाहा   
  • ॐ केतवे नमः स्वाहा   
  • ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्   
  • ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्   
  • ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्   

गायत्री मंत्र से आहुति

अब 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करते हुए हवन सामग्री से 21 आहुति दें। मंत्र इस प्रकार है-

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा 

फिर इन मंत्रों से हवन में आहुति दें

  • ॐ गणेशाय नम: स्वाहा
  • ॐ गौरये नमः स्वाहा   
  • ॐ वरुणाय नमः स्वाहा   
  • ॐ दुर्गाय नमः स्वाहा   
  • ॐ महाकालिकाय नमः स्वाहा   
  • ॐ हनुमते नमः स्वाहा   
  • ॐ भैरवाय नमः स्वाहा   
  • ॐ कुलदेवताय नमः स्वाहा   
  • ॐ स्थान देवताय नमः स्वाहा   
  • ॐ ब्रह्माय नमः स्वाहा   
  • ॐ विष्णुवे नमः स्वाहा   
  • ॐ शिवाय नमः स्वाहा

माता के मंत्रों से दें आहुति

  • ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा
  • ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा
  • ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा
  • ॐ चंद्र घंटा देवी नमः स्वाहा
  • ॐ कुष्मांडा देवी नमः स्वाहा
  • ॐ स्कन्द देवी नमः स्वाहा
  • ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा
  • ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा
  • ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा
  • ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा
  • ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुते स्वाहा।

इसके बाद माता के नर्वाण मंत्र से 108 बार आहुति दें

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

इन मंत्रों से भी हवन में आहुति दें

  • या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु च्छायारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत् । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
  • स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया । त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता । करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी । शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ।। स्वाहा
  • या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै । रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते । या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः । सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ।। स्वाहा

पूर्ण आहुति मंत्र से दें आहुति

ऊँ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात पूर्णादिमं उच्यते, पुणस्य पूर्णम् उदच्यते। पूर्णस्य पूर्णभादाय पूर्णमेवावाशिष्यते।।

पूर्ण आहुति देने की विधि

इसके लिए एक सूखा नारियल (गोला) लें। उसके ऊपर का हिस्सा थोड़ा सा काट दें। फिर उसमें घी, बताशा, लौंग, सुपारी, जायफल और बची हुई हवन सामग्री भर लें। फिर गोले पर लाल कलावा लपेटकर दोनों हाथों से उसे पकड़कर अग्नि कुंड के पास आएं और ऊपर दिए गए पूर्णाहुति मंत्र का उच्चारण करते हुए स्वाहा के साथ इसे हवन कुंड में अर्पित कर दें। इस पूर्ण आहुति के बाद माता के पास यथाशक्ति दक्षिणा रख दें। इसके बाद माता से पूजा में हुई भूल-चूक की क्षमा प्रार्थना करें। इसके बाद परिवार सहित माता की आरती करें और फिर सभी में प्रसाद वितरित कर दें। 

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