रत्नों को लेकर लोगों में हमेशा से खास दिलचस्पी रही है। कोई इन्हें फैशन के लिए पहनता है तो कोई ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर। इन्हीं रत्नों में खूबसूरत मोती भी शामिल है। माना जाता है कि मोती मन को शांत रखने में मदद करता है। लेकिन हर किसी के लिए मोती पहनना शुभ हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ राशियों के लिए इसे नुकसानदायक बताया है। आइए जानते हैं इन राशियों के बारे में
चंद्रमा से जुड़ा है मोती
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मोती का संबंध चंद्र देव से होता है। चंद्रमा को मन, भावनाओं और माता का कारक माना जाता है। कुंडली में चंद्रमा कमजोर होने पर मानसिक तनाव, बेचैनी और भावनात्मक अस्थिरता जैसी परेशानियां होने की बात कही जाती है। ऐसे में मोती धारण करने से मन को शांति और भावनात्मक मजबूती मिलने की मान्यता है।
ये 5 राशियां न पहनें मोती
ज्योतिष के अनुसार वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों को मोती पहनने से बचना चाहिए। इन राशियों के स्वामी क्रमशः शुक्र, बुध और शनि हैं, जिनका चंद्रमा के साथ संबंध अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए बिना ज्योतिषीय सलाह के इन राशियों के जातकों को मोती नहीं पहनना चाहिए।
हो सकता है नकारात्मक असर
मान्यता है कि गलत राशि या कुंडली में मोती पहनने से मानसिक उलझन और तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य और रिश्तों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही जाती है। इसलिए रत्न धारण करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
किन राशियों के लिए शुभ?
मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि या लग्न वालों के लिए मोती को शुभ माना जाता है। इससे जीवन में स्थिरता और मानसिक शांति आने की मान्यता है। वहीं सिंह, तुला और धनु राशि वाले लोग इसे कुंडली का विश्लेषण कराने के बाद ही धारण करें।
इन रत्नों के साथ पहनें
जानकारों के अनुसार मोती को पुखराज और मूंगा के साथ पहना जा सकता है, मूंगा मंगल ग्रह से जुड़ा रत्न है। वहीं इसे हीरा, नीलम, पन्ना या गोमेद के साथ पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।
मोती पहनने की सही विधि
- मोती को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वाकर कनिष्ठा या अनामिका उंगली में धारण करने की बात कही गई है।
- इसे शुक्ल पक्ष के सोमवार को पहनना शुभ बताया है।
- मोती धारण करने से पहले अंगूठी को कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध करने की मान्यता है।
- टूटे, नकली या किसी अन्य व्यक्ति के उतारे हुए मोती को नहीं पहनना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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