पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है पितृ पक्ष में पूर्वज धरती लोक पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में अगर जो व्यक्ति इस समय श्राद्धकर्म, पितृ पूजन या स्मरण नहीं करते हैं तो उनसे पूर्वज नाराज हो सकते हैं। पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध कर्म और पिंडदान करना अत्यंत ही महत्वपूर्ण होता है। आज यानी 5 अक्टूबर को पितृ पक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध है। तो आइए जानते हैं आज श्राद्ध कर्म करने के लिए कुतुप मुहूर्त कितने बजे तक रहेगा।
पितृ पक्ष 2026 दशमी तिथि श्राद्ध मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि का आरंभ 5 अक्टूबर को भोर 3 बजकर 53 मिनट पर होगा। दशमी तिथि का समापन 6 अक्टूबर को रात 2 बजकर 7 मिनट पर होगा। दशमी तिथि के दिन कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। वहीं रौहिण मुहूर्त का आरंभ दोपहर 12 बजकर 33 मिनट पर होगा और समाप्त दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर होगा। बता दें कि श्राद्ध कर्म करने के लिए कुतुप के साथ ही रौहिण मुहूर्त को अति उत्तम माना गया है।
दशमी तिथि को किसका श्राद्ध किया जाता है?
दशमी श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु दशमी तिथि पर हुई हो। इस दिन शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है। दशमी श्राद्ध को दसमी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। दशमी श्राद्ध उन पितरों को समर्पित होता है, जो गृहस्थ जीवन व्यतीत कर चुके एवं वंश परंपरा को आगे बढ़ा चुके हों। अन्य शब्दों में कहें तो दशमी तिथि पर वानप्रस्थ आश्रम के अनुयायियों का श्राद्ध करना उत्तम माना जाता है। इस दिन किया गया श्राद्ध अनुष्ठान धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि हेतु सहायक होता है।
शास्त्रों के अनुसार, श्राद्ध उसी तिथि को करना सर्वश्रेष्ठ है, जिस तिथि को पितर का निधन हुआ हो। तिथि विशेष पर किया गया श्राद्ध कर्म ही उस पितर को प्राप्त होता है, जिसकी तृप्ति के लिए यह श्राद्ध कर्म किया गया है। यदि किसी को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है तो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।
इन नियमों का रखें ध्यान
- श्राद्ध का भोजन बनाने के बाद पंचबलि भोग जरूर निकालें। पंचबली भोग इनके लिए निकाला जाता है- गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी, देव)
- श्राद्ध का भोजन सात्विक और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए बनाएं। इसमें लहसुन-प्याज का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
- श्राद्ध कर्म संपन्न होने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें और विदा करें।
- दिशा का ध्यान रखें। तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
8 अक्टूबर को गुरु करेंगे नक्षत्र परिवर्तन, इन 3 राशियों की बढ़ेगी परेशानी, आर्थिक मामले में बरतनी होगी सावधानी