सनातन धर्म में पितृ पक्ष वो विशेष दिन हैं, जो पितरों को समर्पित किए गए हैं। माना जाता है कि इन दिनों पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। श्राद्ध के दौरान पितरों की तृप्ति और उनके निमित्त किए जाने वाले कर्मों का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में आचार्य इंदु प्रकाश बता रहे हैं कि श्राद्ध कर्म के दौरान किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।
श्राद्ध के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- श्राद्ध कार्य दोपहर के समय करना चाहिए और अपनी भूमि पर या किसी पवित्र स्थान पर करना चाहिए। श्राद्ध कर्म में गाय का घी, दूध या दही काम में लेना बेहतर होता है। श्राद्ध में तुलसी व तिल का प्रयोग करना चाहिए।
- श्राद्ध के दौरान हो सके तो चांदी के बर्तनों का उपयोग व दान करना चाहिए।
- श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन जरूर करवाना चाहिए। जो व्यक्ति बिना ब्राह्मण को भोजन कराए श्राद्ध कर्म करता है, उसके घर में पितर भोजन ग्रहण नहीं करते और ऐसा करने से व्यक्ति को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- श्राद्ध से एक दिन पहले ही ब्राह्मण को खाने के लिये निमंत्रण दे आना चाहिए।
- आपके जिस भी पूर्वज का स्वर्गवास है, उसी के अनुसार ब्राह्मण या ब्राह्मण की पत्नी को निमंत्रण देकर आना चाहिए। अगर आपके पूर्वज पुरुष हैं, तो पुरुष ब्राह्मण को और महिला हैं तो ब्राह्मण की पत्नी को भोजन खिलाना चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि अगर आपका पूर्वज सौभाग्यवती महिला थीं, तो किसी सौभाग्यवती ब्राह्मण की पत्नी को ही भोजन का निमंत्रण दें।
- ब्राह्मण को खाना खिलाते समय दोनों हाथों से खाना परोसें। ध्यान रहे श्राद्ध में ब्राह्मण का खाना एक ब्राह्मण को ही दिया जाना चाहिए, किसी जरूरतमंद को नहीं। अतः श्राद्ध में ब्राह्मण का भोजन एक सुपात्र ब्राह्मण को ही कराएं।
- भोजन कराते समय ब्राह्मण को आसन पर बिठाएं। आप कपड़े, ऊन, कुश या कंबल आदि के आसन पर बिठाकर भोजन करा सकते हैं। अपनी इच्छा अनुसार कुछ दक्षिणा और कपड़े आदि भी देने चाहिए।
- श्राद्ध के दिन बनाये गये भोजन में से गाय, देवता, कौओं, कुत्तों और चींटियों के निमित्त भी भोजन जरूर निकालना चाहिए। किसी भी हाल में कुत्ते और कौओं का भोजन उन्हें ही कराना चाहिए, जबकि देवता और चींटी का भोजन आप गाय को खिला सकते हैं।
- ब्राह्मण आदि को भोजन कराने के बाद ही घर के बाकी सदस्यों या परिजनों को भोजन कराएं।
- एक ही नगर में रहने वाली अपनी बहन, जमाई और भांजे को भी श्राद्ध के दौरान भोजन जरूर कराएं। ऐसा न करने वाले व्यक्ति के घर में पितरों के साथ साथ देवता भी भोजन ग्रहण नहीं करते।
- श्राद्ध के दिन अगर कोई भिखारी या कोई जरूरतमंद आ जाये, तो उसे भी आदरपूर्वक भोजन जरूर कराना चाहिए।
इन चीजों का करें उपयोग
श्राद्ध के भोजन में जौ, मटर, कांगनी और तिल का उपयोग श्रेष्ठ रहता है। तिल की मात्रा अधिक होने पर श्राद्ध अक्षय हो जाता है। कहते हैं तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं। साथ ही श्राद्ध के कार्यों में कुशा का भी महत्व है।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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