श्राद्ध कर्म में कौवों के लिए खाना क्यों निकाला जाता है? जानें धार्मिक महत्व
श्राद्ध कर्म में कौवों के लिए खाना क्यों निकाला जाता है? जानें धार्मिक महत्व
श्राद्ध कर्म में कौओं के लिए भोजन जरूर निकालना चाहिए। पितृ पक्ष के प्रथम दिन पहला न्योता, दूसरा पूर्वज की मृत्यु की तिथि पर, तीसरा आमंत्रण नवमी तिथि और अंतिम बार पितृ विसर्जन कौओं को आमंत्रित कर भोजन कराने की या उनके निमित भोजन निकालने की परंपरा है।
Published : Sep 28, 2026 11:52 pm IST, Updated : Sep 28, 2026 11:54 pm IST
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कौवों को पितृ का प्रतीक माना जाता है। श्राद्ध में कौवे को भोजन खिलाने या उनके निमित भोजन निकालने से पितरों को खाना मिलता है और उनकी तृप्ति होती है। इसलिए श्राद्ध में कौओं के नाम का भोजन जरूर निकालना चाहिए।
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पितृ पक्ष में पितरों का जब श्राद्ध कर्म किया जाता है तो उस दिन कौवों के लिए खाना निकाला जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कौवों को भोजन खिलाने से पितरों को खाना मिलता है। कहा जाता है कि अगर कौए ने श्राद्ध का भोजन खा लिया है तो इसका मतलब है कि पितरों ने भी भोजन ग्रहण कर लिया है।
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पितरों के लिए बनाए गए भोजन में से पंचबली भोग यानी कौए, गाय, कुत्ते, चींटी और देवों का भोग निकालना जरूरी माना जाता है। कहते हैं कि पितृ उनके रूप में धरती पर आते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में कौए को भोजन जरूर कराया जाता है।
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वहीं गरुड़ पुराण के अनुसार, कौए को यम का प्रतीक माना जाता है। अगर कौए श्राद्ध का भोजन ग्रहण कर लें तो पितरों की आत्मा तृप्त हो जाती है। इतना ही नहीं कौए को भोजना कराने से यमराज प्रसन्न होते हैं और पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है। पितृ पक्ष के दौरान कौए को भोजन कराने से कई गुना अधिक लाभ प्राप्त होगा।