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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: मलमास कैसे बना सबसे पावन महीना? जानें इस दौरान क्या करना होता है सबसे शुभ

Purushottam Maas katha In Hindi: पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू हो गया है और 15 जून तक ये पावन महीना रहेगा। क्या आप जानते हैं कि इसे अधिकमास के अलावा मलमास के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों में मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी रोचक कथा बताई गई है।

purushottam maas katha In Hindi- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मलमास कैसे बना सबसे पावन महीना?

Purushottam Maas katha In Hindi: सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास बेहद पावन महीना माना गया है। कहते हैं इस महीने में किए गए दान-पुण्य के कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। ये महीना हर तीसरे साल में एक बार आता है। इस महीने में व्रत रखने, भगवान विष्णु और कृष्ण जी की पूजा करने और तुलसी उपासना करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके साथ ही इस महीने में एक खास कथा सुनना भी बेहद शुभ फलदायी माना गया है। चलिए आपको बताते हैं उस पावन कथा के बारे में विस्तार से यहां।

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा

पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा का वर्णन किया गया है। इस कथा के अनुसार सभी बारह महीनों के तो अलग-अलग स्वामी थे पर मलमास का कोई स्वामी नहीं था जिस कारण इसकी काफी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास पहुंचा। इसके बाद श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुंचे, जहां पर श्रीकृष्ण विराजमान थे। भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की परेशानी जानकर उसे वरदान दिया कि अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं। जिससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाहित हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से जाना जाता हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं। जिससे अब से तुम पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे।

शास्त्रों के अनुसार इसलिए इस मास में जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस मास में श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दौरान तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं इस माह में किया गया दान सौ गुना अधिक फल देता है। इसलिए अधिक मास में दान-पुण्य देने का बहुत महत्व होता है। इस माह में धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करना भी बेहद पुण्य का काम माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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