ऋषि पंचमी का व्रत रजस्वला दोष से मुक्ति पाने के लिए रखा जाता है। इस साल यह व्रत 15 सितंबर को यानी गणेश चतुर्थी के अगले दिन पड़ेगा। हिंदू धर्म में मान्यता है कि मासिक धर्म के समय स्त्रियां दूषित होती हैं, इसलिए ही इस दौरान महिलाओं को भोजन पकाने या किसी भी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने से मना किया जाता है। कहते हैं जो स्त्री किसी कारण इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर पाती उसे रजस्वला दोष लगता है। इसी दोष से मुक्ति पाने के लिए भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है। यहां आप जानेंगे इस व्रत में क्या-क्या सामग्री लगती है।
ऋषि पंचमी पूजा सामग्री लिस्ट
- श्रीफल यानी नारियल
- केले के पत्ते
- लौंग
- छुआरा आठ
- काजू आठ
- मखाने आठ
- बादाम आठ
- इलायची
- मिट्टी का दीपक
- गुड़
- पान
- रोली
- मौली
- आलता
- अष्टगंध
- 7 तरह का नैवेद्य
- मूंगफली आठ
- किसमिस आठ
- केले आठ
- पवित्र जल
- पंचामृत
- रूई की बत्ती
- गाय को घी
- सात पूजा सुपारी
- आम के पत्ते
- मट्टी का कलश
- चावल
- हल्दी की गांठ
- चौक
- आटा
- कपूर
- सफेद चंदन
ऋषि पंचमी की पूजा विधि
- ऋषि पंचमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद पूजा स्थान पर एक चौकी बिछाकर उसपर लाल कपड़ा बिछाएं।
- फिर वहां सप्तऋषि की तस्वीर स्थापित करें।
- साथ में एक कलश में जल भरकर रखें।
- इसके बाद सप्तऋषियों को अर्घ्य दें।
- उन्हें फल, फूल, घी और पंचामृत आदि अर्पित करें।
- साथ ही सप्तऋषियों के मंत्रों का जाप करें और अंत में पूजा में हुई अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
- फिर भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांट दें।
ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त 2026
- ऋषि पञ्चमी पूजा मुहूर्त - 11:02 AM से 01:30 PM
- पंचमी तिथि प्रारम्भ - 15 सितम्बर 2026 को 07:44 AM बजे
- पंचमी तिथि समाप्त - 16 सितम्बर 2026 को 08:59 AM बजे
ऋषि पंचमी मंत्र
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहन्तु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः'॥
ऋषि पंचमी पर इस मंत्र से अर्घ्य देने के बाद ऋषि पंचमी की व्रत कथा सुनें और अंत में आरती करें। इस दिन फलाहार खाकर उपवास रखें और इस व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
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