Shani Grah: कुंडली में शनि की स्थिति का क्या है आप पर प्रभाव? जानें अलग-अलग भावों में इसका फल
Shani Grah: शनि ग्रह को ज्योतिष में न्याय का देवता कहा जाता है और 12 भावों में बैठकर ये अलग-अलग फल देते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि सभी भावों में शनि का क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

Shani Grah: शनि ग्रह को ज्योतिष में न्याय का देवता कहा जाता है। कुंडली के सभी भावों में इनका असर अलग-अलग होता है। कुछ ऐसे भाव हैं जहां इनके होने से जीवन में खुशहाली आती है वहीं कुछ ऐसे घर भी हैं जहां इनकी स्थिति शुभ नहीं मानी जाती। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि कुंडली के सभी 12 भावों में शनि का प्रभाव कैसा होता है।
कुंडली के प्रथम भाव में शनि का प्रभाव
कुंडली के पहले भाव को लग्न भाव भी कहा जाता है। इस भाव का सीधा संबंध आपके मस्तिष्क से भी है। यहां बैठे शनि व्यक्ति को संयमी बनाते हैं। हालांकि ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। ऐसे लोग बेहद गंभीर आपको नजर आ सकते हैं।
कुंडली के द्वितीय भाव में शनि का प्रभाव
द्वितीय भाव को धन का भाव भी कहा जाता है। इस भाव में शनि कमजोर हो तो आर्थिक परेशानियां पैदा हो सकती हैं। इसके साथ ही द्वितीय भाव में बैठा शनि ससुराल पक्ष के साथ परेशानियां पैदा कर सकता है। ऐसे लोगों के विवाह में भी देरी हो सकती है।
कुंडली के तृतीय भाव में शनि का प्रभाव
इस भाव में शनि को ज्यादा अनुकूल नहीं माना जाता। शनि यहां बैठकर आपको दुर्घटनाओं का शिकार बना सकते हैं। अनजाना भय ऐसे लोगों को सता सकता है। जीवन में कठिनाइयां भी ऐसे लोगों को आती हैं जिनके तृतीय भाव में शनि हो। हालांकि भाई-बहनों के लिए शनि की यह स्थिति अच्छी होती है।
कुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का प्रभाव
कुंडली का चतुर्थ भाव सुख का भाव कहा जाता है। इस भाव में बैठा शनि पारिवारिक जीवन में सुख की कमी कर सकता है। ऐसे लोगों को अपना वाहन, मकान खरीदने में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
कुंडली के पंचम भाव में शनि का प्रभाव
कुंडली के पंचम भाव में बैठा शनि संतान से संबंधित परेशानियां पैदा कर सकता है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी दिक्कतें आ सकती हैं। इस भाव में बैठा शनि व्यक्ति को गलत संगति की ओर ले जाता है।
कुंडली के षष्ठम भाव में शनि का प्रभाव
इस भाव में शनि की स्थिति अच्छी कही जाती है। जिन लोगों के इस भाव में शनि होता है वो अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं। ऐसे लोगों के अंदर रोग से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है।
कुंडली के सप्तम भाव में शनि का प्रभाव
कुंडली के सातवें भाव में बैठा शनि व्यक्ति को अत्यधिक कामुक बना सकता है। इसके साथ ही ऐसे लोगों का विवाह भी देरी से हो सकता है। सामाजिक स्तर पर मान-सम्मान की कमी हो सकती है।
कुंडली के अष्टम भाव में शनि का प्रभाव
इस भाव में शनि का स्थित होना पिता को दिक्कतें दे सकता है। ऐसे लोगों को अनजाना भय सता सकता है और जीवन में बार-बार परेशानियां आ सकती हैं।
कुंडली के नवम भाव में शनि का प्रभाव
इस भाव में बैठा शनि अच्छा माना जाता है। ऐसे लोगों को मेहनत के अनुसार धन प्राप्त होता है। नवम भाव में बैठकर शनि व्यक्ति का भाग्योदय भी करते हैं।
कुंडली के दशम भाव में शनि का प्रभाव
कुंडली के दसवें भाव में शनि शुभ माना जाता है। इस भाव में बैठा शनि व्यक्ति को अनुशासित और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प बनाता है। ऐसे लोगों को सफलता मिलने में देरी हो सकती है लेकिन सफलता मिलती जरूर है। ऐसे लोग उच्च पदों तक पहुंचते हैं।
कुंडली के एकादश भाव में शनि का प्रभाव
कुंडली के एकादश भाव में भी शनि की स्थिति अच्छी मानी जाती है। ऐसे लोगों को लाभ देरी से ही सही लेकिन मिलता जरूर है। वहीं अच्छे लोगों से ऐसे लोगों का संपर्क हमेशा बना रहता है।
कुंडली के द्वादश भाव में शनि का प्रभाव
द्वादश भाव में शनि मिलेजुले परिणाम दिलाता है। ऐसे लोगों के पास पैसा होता है और लेकिन खर्चे भी इनके अधिक होते हैं। इस भाव में बैठा शनि विदेशी कारोबार में लाभ दिलाता है और ऐसे लोग विदेश भी अवश्य जाते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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