शनि ग्रह को ज्योतिष में क्रूर ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए कुंडली में इनकी खराब स्थिति आपके जीवन में प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। कुंडली के सभी 12 भावों में से 3 भावों में शनि को सबसे अशुभ माना जाता है। इन भावों के बारे में ही आज हम आपको जानकारी देंगे। अगर आपके भी इन्हीं भावों में शनि ग्रह बैठे हैं तो आपको शनि से जुड़े उपाय अवश्य करने चाहिए।
प्रथम भाव में शनि
कुंडली के प्रथम भाव को लग्न भाव भी कहा जाता है। इस भाव का कारक ग्रह सूर्य है जोकि शनि ग्रह के शत्रु हैं, ऐसे में पहले भाव में शनि का बैठना आपके लिए प्रतिकूल साबित हो सकता है। इस भाव में बैठे शनि आपके पराक्रम को कम कर सकता है। आपके वैवाहिक जीवन में भी दिक्कतों का सामना आपको करना पड़ सकता है। इस भाव में बैठा शनि आपको आलसी और लापरवाह बनाता है और साथ ही शारीरिक समस्याएं भी आपको हो सकती हैं।
चतुर्थ भाव में शनि
इस भाव के कारक ग्रह चंद्रमा हैं और शनि की इनके साथ भी शत्रुता है। इसलिए चतुर्थ भाव में भी शनि की स्थिति शुभ नहीं मानी जाती। इस भाव में बैठे शनि माता के साथ आपके संबंधों को खराब कर सकते हैं। वाहन चलाते समय दुर्घटनाएं हो सकती हैं। वहीं भूमि-भवन खरीदने में भी दिक्कतों का सामना आपको करना पड़ सकता है। इस भाव में बैठे शनि के कारण करियर क्षेत्र में भी दिक्कतें आती हैं। पारिवारिक जीवन में सुख की कमी हो सकती है।
एकादश भाव में शनि
इस भाव को लाभ का भाव कहा जाता है और इस भाव के कारक ग्रह गुरु हैं। इस भाव में शनि के बैठने से आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रोजगार के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। इसके साथ ही परिवार में भी दिक्कतों का सामना आप कर सकते हैं। यहां बैठे शनि आपके लग्न को भी देखते हैं इसलिए मानसिक समस्याओं का सामना भी आपको करना पड़ सकता है। प्रेम जीवन में बार-बार उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
अगर आपकी कुंडली में भी शनि इन 3 भावों में बैठे हैं तो आपको नीचे दिए गए उपाय अवश्य करने चाहिए। इन उपायों को करने से शनि ग्रह के बुरे प्रभाव दूर हो सकते हैं।
उपाय
- शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द और लोहे से बनी चीजों का दान करने से लाभ होगा।
- हनुमान चालीसा का निरंतर जप शनि के दुष्प्रभावों को दूर करेगा।
- जरूरतमंदों की सेवा करना और उन्हें दान देना शुभ।
- शनि ग्रह के मंत्रों का जप करने से शनि की प्रतिकूलता दूर होगी।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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