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शनि की महादशा में 2 ग्रहों की अंतर्दशा के दौरान होती है व्यक्ति की 'अग्निपरीक्षा', धैर्य और अनुशासन के साथ चलने वाले को मिल सकती है सफलता

शनि की महादशा में राहु और सूर्य की अंतर्दशा को चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इन अंतर्दशाओ के दौरान कैसे परिवर्तन जीवन में आ सकते हैं इसके बारे में हम आपको जानकारी देंगे।

Shani Mahadasha- India TV Hindi
Image Source : CANVA शनि महादशा

 

ज्योतिष शास्त्र में शनि के कर्मफल दाता ग्रह माना जाता है। व्यक्ति के जीवन में 19 सालों तक शनि की महादशा का असर रहता है। शनि महादशा के दौरान सभी ग्रहों की अंतर्दशाएं भी आती हैं और इन अंतर्दशाओं में दो ग्रहों की अंतर्दशा को बहुत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यह अंतर्दशाएं हैं सूर्य और राहु की। शनि की महादशा में इन ग्रहों की अंतर्दशा के दौरान व्यक्ति के धैर्य, साहस, नैतिक मूल्यों आदि की कड़ी परीक्षा होती है। हालांकि, जो व्यक्ति परीक्षा में पास होता है उसे बड़ी सफलता भी जीवन में प्राप्त हो सकती है। 

शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा

शनि और सूर्य भले ही पिता पुत्र हों लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों के बीच शत्रुता का संबंध है। ऐसे में शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को चुनौतीपूर्ण माना गया है। शनि-सूर्य दशा के दौरान व्यक्ति कार्यस्थल पर उतार-चढ़ाव का सामना कर सकता है क्योंकि व्यक्ति का अहंकार उस पर हावी हो सकता है और सहकर्मियों के साथ मतभेद पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही सेहत में भी उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। व्यक्ति का व्यवहार गुस्सैल हो सकता है और अपनी बातों को लोग पर व्यक्ति जबरन थोपने की कोशिश कर सकता है। इसके साथ ही पिता और गुरुजनों के साथ मतभेद भी पैदा हो सकते हैं। व्यक्ति अनुशासन में नहीं रहता और अव्यवस्थित हो सकता है। हालांकि, जो व्यक्ति शनि-सूर्य दशा के दौरान अपने गुस्से पर काबू पा ले, अहंकार को खुद पर हावी न होने दे और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करे और मेहनत और अनुशासन का दामन न छोड़े उसे शनि-सूर्य की दशा के बाद शुभ परिणाम जीवन में मिल सकते हैं। 

शनि की महादशा में राहु की अंतर्दशा

शनि की महादशा में राहु की अंतर्दशा को भी बेहद चुनौतीपूर्ण माना गया है। इस दशा के दौरान व्यक्ति के जीवन में अचानक से उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। बनते काम भी बिगड़ सकते हैं और व्यक्ति का मन अशांत हो सकता है। गलत संगति में पड़ने की भी इस दौरान आशंका रहती है। राहु के प्रभाव के कारण व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर सकता है और सही रास्ते से भटक सकता है। इसके साथ ही भ्रम और अज्ञात डर का सामना भी व्यक्ति को करना पड़ सकता है। हालांकि, शनि-राहु की दशा के दौरान व्यक्ति धैर्य बनाए रखे, नैतिक मूल्यों को समझकर उनपर चलने की कोशिश करे, भटकाव से बचने के लिए अनुशासित रहे और योग-ध्यान और आध्यात्म का सहारा ले तो इस दशा के बाद जबरदस्त सफलता जीवन में प्राप्त हो सकती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि शनि की महादशा में किन ग्रहों की अंतर्दशा शुभ साबित होती है तो इस बारे में हमारी वेबसाइट पर विस्तार से पढ़ सकते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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