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नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को चढ़ाएं उनके प्रिय फूल, पूरी होगी हर मनोकामना

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को उनके प्रिय जरूर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को मनोवांछित फल देती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मां ब्रह्मचारिणी

मां दुर्गा का आगमन हो चुका है। सोमवार को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। दूसरे दिन माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त माता रानी की सच्चे मन से आराधना करते हैं उसकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाती हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। तो आइए अब जानते हैं कि नवरात्रि के दूसरे देवी मां कौनसे फूल अर्पित करने चाहिए और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

मां ब्रह्मचारिणी को चढ़ाएं उनके प्रिय फूल

नवरात्रि का दूसरा मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। इस दिन देवी मां की विधिपूर्वक पूजा करने के साथ उनके प्रिय फूल भी जरूर अर्पित करें। मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और चमेली का फूल अति प्रिय है। तो नवरात्रि के दूसरे दिन देवी मां को इन दोनों फूल में से कोई एक भी जरूर अर्पित करें। देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से जीवन में आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि होती है।

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 04:40 ए एम से 05:30 ए एम
प्रातः संध्या- 05:05 ए एम से 06:19 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 11:44 ए एम से 12:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 05:56 पी एम से 06:21 पी एम
सायाह्न संध्या- 05:56 पी एम से 07:10 पी एम

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

सफेद वस्त्र धारण किए हुए मां ब्रह्मचारिणी के दो हाथों में से दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। इनकी पूजा से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को संदेश देती हैं कि परिश्रम से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारद जी के उपदेश से मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की थी, इसलिए इन्हें तपश्चारिणी भी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी कई हजार वर्षों तक जमीन पर गिरे बेलपत्रों को खाकर भगवान शंकर की आराधना करती रहीं और बाद में उन्होंने पत्तों को खाना भी छोड़ दिया, जिससे उनका एक नाम अपर्णा भी पड़ा।  देवी मां हमें हर स्थिति में परिश्रम करने की और कभी भी हार न मानने की प्रेरणा देती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि

  • नवरात्रि के दूसरे दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें।
  • इसके बाद मंदिर को साफ कर और चारों तरफ गंगाजल छिड़क लें।
  • अब माता रानी को फूल, चंदन, अक्षत, रोली, पान, सुपारी और लौंग अर्पित करें।
  • मां ब्रह्मचारिणी को पंचामृत और चीनी या गुड़ वाली मिठाई का भोग लगाएं।
  •  मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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