Surya Grahan 2026 Date: हिंदू धर्म में चाहे चंद्र हो या सूर्य दोनों ही ग्रहण को अशुभ माना गया है। ग्रहण के दिन कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य करना पूरी तरह वर्जित होता है। इतना ही नहीं ग्रहण के समय भोजन करना और बनाने की भी मनाही होती है। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है, इसलिए इस समय नए कार्य, पूजा-पाठ और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। ग्रहण के समय इन कार्यों को करने से अशुभ परिणाम दोष उत्पन्न हो सकते हैं।
आपको बता दें कि ग्रहण से पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है, जो कि अशुभ समय माना गया है। सूतक के दौरान वातावरण में नकारात्मकता अधिक रहती है, इसलिए इस समय कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए। चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले लग जाता है, जबकि सूर्य ग्रहण का सूतक काल12 घंटे पहले लग जाता है। तो आइए अब हम आपको बताएंगे कि इस साल का पहला सूर्य ग्रहण कब लग रहा है और ग्रहण के साथ ही सूतक काल का समय क्या रहेगा।
सूर्य ग्रहण 2026 कब लग रहा है? डेट और टाइमिंग
अगर आप भी सूर्य ग्रहण की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति में है तो यहां हम आपका सारा कंफ्यूजन दूर कर देंगे। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 16 नहीं बल्कि 17 फरवरी को लगने जा रहा है। 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर आरंभ होगा। सूर्य ग्रहण का समापन शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होगा। यह सूर्य ग्रहण लगभग 4 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। हालांकि साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा?
यह ग्रहण, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया, मॉरीशस, अर्जेन्टीना, सहित तन्जानिया, चिली और दक्षिण अमेरिकी देशों में दिखाई देगा। यह ग्रहण दक्षिणी अफ्रीका के क्षेत्रों, दक्षिण अटलान्टिक महासागर, दक्षिणी प्रशान्त महासागर और अन्टार्कटिका में भी आंशिक रूप से दिखायी देगा।
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कहां नजर नहीं आएगा?
इस साल का का पहला सूर्य ग्रहण भारत, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, म्यान्मार, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य एशियाई देशों से दिखाई नहीं देगा। इसके अतिरिक्त यह ग्रहण यूरोप, उत्तर अमेरिका के अधिकांश भागों, अफ्रीका के मध्य एवं उत्तरी क्षेत्रों तथा ऑस्ट्रेलिया से भी नजर नहीं देगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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