Somnath Jyotirlinga Pauranik Katha: सनातन धर्म में ज्योतिर्लिंगों को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। ये भारत के ऐसे पावन स्थल हैं जहां स्वयं महादेव प्रकाश रूप में प्रकट हुए। इन्हीं में सबसे पहला और प्रमुख ज्योतिर्लिंग है सोमनाथ। गुजरात में समुद्र के किनारे स्थित यह तीर्थ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इससे जुड़ी कथा भक्ति, तपस्या और शिव कृपा का अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। आइए जानते हैं सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कहानी, जहां पर चंद्रदेव को मिली मुक्ति और अमरता।
ज्योतिर्लिंग और सोमनाथ का महत्व
पुराणों के अनुसार भगवान शिव 12 अलग-अलग स्थानों पर स्वयं प्रकट हुए, जिन्हें ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। भारत में स्थित ये सभी 12 ज्योतिर्लिंग अत्यंत पूजनीय हैं, लेकिन सोमनाथ को पहला ज्योतिर्लिंग होने का विशेष गौरव प्राप्त है। यह मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में समुद्र तट पर स्थित है और इसे भगवान शिव का प्रथम निवास स्थान भी माना जाता है।
क्या है सोमनाथ का अर्थ?
‘सोम’ का अर्थ है चंद्रमा और ‘नाथ’ का अर्थ है स्वामी। शिव महापुराण सहित कई ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि चंद्रदेव ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहीं कठोर तप किया था। चंद्रदेव की प्रार्थना स्वीकार कर भगवान शिव माता पार्वती के साथ उसी शिवलिंग में विराजमान हुए, जिसे आगे चलकर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कहा गया।
चंद्रदेव को क्यों मिला था श्राप?
दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव से हुआ था, लेकिन चंद्रदेव का अधिक प्रेम रोहिणी के प्रति था। इससे अन्य पत्नियां स्वयं को उपेक्षित महसूस करने लगीं और उन्होंने अपने पिता दक्ष से शिकायत की। क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दे दिया, जिससे उनका तेज और सौंदर्य धीरे-धीरे क्षीण होने लगा।
श्राप से मुक्ति के लिए की थी कठोर तपस्या
दक्ष प्रजापति के श्राप से पीड़ित होकर चंद्रदेव ब्रह्माजी की सलाह पर भगवान शिव की शरण में पहुंचे। उन्होंने नियमपूर्वक कठोर तप किया और 10 करोड़ बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। उनकी तपस्या में कोई कमी नहीं थी, जिससे अंततः महादेव प्रसन्न हुए।
महादेव का वरदान और चंद्रकला का रहस्य
भगवान शिव ने चंद्रदेव को अमरता का वरदान दिया, लेकिन साथ ही दक्ष प्रजापति के वचनों की रक्षा करते हुए यह नियम बनाया कि कृष्ण पक्ष में चंद्रमा की कलाएं घटेंगी और शुक्ल पक्ष में पुनः बढ़ेंगी। पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देगा। इसी कारण शिव को सोमनाथ यानी चंद्रमा के स्वामी कहा गया।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का धार्मिक प्रभाव
मान्यता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से चंद्र दोष समाप्त हो जाता है। यहां पूजा-अर्चना करने से मानसिक शांति मिलती है, आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और शिव-चंद्र दोनों की कृपा प्राप्त होती है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से दर्शन करने पर पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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