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Somwar Pradosh Vrat Katha: सोमवार प्रदोष व्रत के दिन इस कथा को पढ़ पाएं भोलेनाथ की विशेष कृपा, हर कामना हो जाएगी पूर्ण

Somwar Pradosh Vrat Katha: सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत या सोमवार प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। चलिए आपको बताते हैं सोमवार प्रदोष व्रत की कथा क्या है।

Somwar Pradosh Vrat Katha- India TV Hindi
Image Source : CANVA सोमवार प्रदोष व्रत कथा

Somwar Pradosh Vrat Katha (सोमवार प्रदोष कथा): सभी प्रदोष व्रतों में से सोमवार प्रदोष व्रत का खास महत्व माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदोष व्रत भगवान शिव से जुड़ा है और सोमवार का दिन भी शिव जी को ही समर्पित है। ऐसे में जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आज यानी 17 नवंबर 2025 को सोम प्रदोष व्रत रहेगा। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और विधि विधान प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ की अराधना करते हैं। यहां हम आपको बताएंगे सोम प्रदोष व्रत की पावन कथा क्या है। 

Somwar Pradosh Vrat Katha (सोमवार प्रदोष कथा)

सोमवार प्रदोष व्रत कथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी जिसके पति की मृत्यु हो गई थी। अब उसका कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए सुबह होते ही पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। लोगों से भीख मांगकर ही वह स्वयं व पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन ब्राह्मणी जब घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में मिला। ब्राह्मणी उसे घर ले आई। वो लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रुओं ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था और इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था।

राजकुमार ब्राह्मणी के घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और उसे उससे प्यार हो गया। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार पसंद आ गया। अंशुमति के माता-पिता को भगवान शंकर ने सपने में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह करा दो। फिर दोनों ने वैसा ही किया। ब्राह्मणी नियमित प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज सेना की सहायता से राजकुमार ने शत्रुओं को खदेड़ दिया और राज्य को पुनः प्राप्त कर वह आनन्दपूर्वक रहने लगा। इसके बाद राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही शंकर भगवान अपने सभी भक्तों के दिन फेरते हैं।

Somwar Pradosh Vrat Katha PDF

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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