Shani Sade Sati Most Painful Phase On Meen Rashi: शनि साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं और हर चरण की अवधि ढाई साल की होती है। ज्योतिष अनुसार इनमें से दूसरा चरण सबसे मुश्किल माना जाता है। जिसकी कुंडली में शनि की स्थिति ठीक नहीं होती ऐसे लोगों को इस चरण में काफी परेशानियां उठानी पड़ती है। इसलिए ज्योतिषाचार्य इस चरण में शनि से जुड़े उपाय करने की सलाह देते हैं। आज हम आपको बताएंगे 2025 में किस राशि पर शनि साढ़ेसाती के सबसे कष्टदायी चरण की शुरुआत हो गई है और ये चरण कब तक चलेगा।
शनि साढ़ेसाती का सबसे कष्टदायी चरण किस पर?
शनि इस समय मीन राशि में विराजमान हैं। ऐसे में मेष राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है तो वहीं मीन राशि पर इसका दूसरा चरण है तो वहीं कुंभ राशि वालों पर इसका तीसरा यानी आखिरी चरण चल रहा है। चूंकि मीन राशि वालों पर इसका दूसरा चरण है तो ऐसे में 2027 तक का समय इस राशि के लोगों के लिए काफी कष्टदायी हो सकता है। खासतौर से उन लोगों के लिए जिनकी कुंडली में शनि की स्थिति अच्छी नहीं है।
मीन राशि वालों को शनि साढ़ेसाती के कष्टदायी चरण से कब मिलेगी मुक्ति?
इस राशि वालों को शनि साढ़ेसाती के कष्टदायी चरण से मुक्ति 3 जून 2027 को मिलेगी। इस दौरान शनि देव मेष राशि में प्रवेश कर जायेंगे। हालांकि इसी साल 20 अक्टूबर को शनि फिर से मीन राशि में आ जायेंगे जिससे मीन राशि के लोग एक बार फिर से इस दुखदायी चरण की चपेट में होंगे। लेकिन इस बार ये चरण उतना कष्टदायी नहीं होगा। फिर 23 फरवरी 2025 को मीन राशि के लोग पूर्ण रूप से साढ़ेसाती के दूसरे चरण से मुक्ति पा लेंगे क्योंकि इस दिन के बाद से शनि देव मेष राशि में विराजमान रहेंगे।
साढ़ेसाती के कष्टदायी चरण में क्या करना चाहिए?
शनि साढ़ेसाती के कष्टदायी चरण में भूलकर भी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। इस दौरान गरीबों की खूब सेवा करनी चाहिए। साथ ही हर शनिवार शनि देव के मंदिर में जाकर उनकी अराधना करनी चाहिए। शनि दान करना चाहिए और भूखों को भोजन कराना चाहिए। इसके अलावा इस दौरान शनि चालीसा का पाठ भी बेहद फलदायी माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
30 के बाद राजा जैसी जिंदगी जीते हैं इस मूलांक के लोग, शनि की कृपा से खूब कमाते हैं पैसा
दक्षिण दिशा में किचन का होना शुभ होता है या अशुभ? जानें