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अकाल मृत्यु का कारण बन सकती हैं कुंडली में ये ग्रह स्थितियां, जानें कैसे कर सकते हैं बचाव

कुंडली में ग्रहों की कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं जो अकाल मृत्यु का कारण बन सकती है। आज हम इसी के बारे में आपको जानकारी देंगे और साथ ही बताएंगे कि कैसे इन विपरीत परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

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Image Source : CANVA ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र से व्यक्ति के स्वभाव, भूत-भविष्य और मृत्यु के बारे में भी पता चलता है। कुंडली में मौजूद नौ ग्रहों की कुछ विशेष स्थितियां आपको जीवन में सुख देती हैं, वहीं इन्हीं ग्रहों की प्रतिकूल स्थितियों के कारण दिक्कतों का सामना भी आपको करना पड़ सकता है। आपके जीवन के साथ ही कुंडली मृत्यु का कारण भी बताती है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि किन ग्रह स्थितियों में व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो सकती है। 

इन ग्रहों स्थितियों में हो सकती है अकाल मृत्यु

  • अगर कुंडली में राहु-केतु प्रथम, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हों तो अकाल मृत्यु के योग बनते हैं। वहीं अगर राहु-केतु में से कोई भी ग्रह मारकेश से सप्तम भाव में हो तो अकाल मृत्यु हो सकती है। 
  • आठवें और बारहवें भाव के स्वामी की महादशा में अकाल मृत्यु होने की आशंका होती है। हालांकि, महादशा के साथ ही अन्य पक्षों पर भी नजर डालना आवश्यक होता है। 
  • अगर जन्मकुंडली में शनि, चंद्रमा और मंगल लगातार चौथे, सातवें और दसवें भाव में विराजमान हों तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति की मृत्यु किसी खाई में या फिर ऊंचे स्थान से गिरकर हो सकती है। 
  • लग्न में मिथुन, तुला और धनु में से कोई राशि हो और यहां सूर्य या चंद्रमा बैठे हों तो ऐसे लोगों की अकाल मृत्यु पानी में डूबकर हो सकती है। 
  • शनि ग्रह अगर कुंडली के अष्टम भाव में मौजूद हो तो इसे भी अकाल मृत्यु का कारण माना जाता है। हालांकि अष्टम भाव में शनि की शुभ स्थिति व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करती है। 
  • राहु और केतु का अष्टम भाव में होना भी शुभ नहीं माना जाता। इन दोनों ग्रहों का अष्टम भाव में होने से दुर्घटनाओं में मृत्यु हो सकती है। 
  • अगर राहु और मंगल की कुंडली में युति हो रही हो या फिर राहु-मंगल के बीच समसप्तक योग बन रहा हो तब भी अकाल मृत्यु होने की आशंका होती है। 

अकाल मृत्यु से बचने के उपाय

  • अगर आप दीर्घायु चाहते हैं तो आपको महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से बलाएं टल जाती हैं। 
  • क्रूर ग्रहों शनि, मंगल, राहु और केतु के उपायों को करने से भी अकाल मृत्यु से आप बच सकते हैं। 
  • हनुमान चालीसा वह कुंजी है जिससे आप अकाल मृत्यु के भय और दुर्घटनाओं से बच निकल सकते हैं। 
  • वाहन में होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए आपको वाहन सुरक्षा यंत्र वाहन में लगाना चाहिए। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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