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सप्ताह के इन दो दिन भूलकर भी नहीं खानी चाहिए खिचड़ी, जानिए इसके पीछे की वजह

Khichdi Niyam: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सप्ताह के कुछ खास दिनों में खिचड़ी बनाने और खाने से परहेज किया जाता है। खासकर गुरुवार और रविवार को खिचड़ी का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। जानिए आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक कारण बताए जाते हैं।

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Image Source : MAGNIFIC सप्ताह के ऐसे दिन जब नहीं खानी चाहिए खिचड़ी

Khichdi Niyam: सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन अलग-अलग देवी-देवताओं और ग्रहों को समर्पित हैं। ऐसे में दिन के अनुसार, पहनावे और खानपान के कुछ नियम बताए गए हैं। सप्ताह में दो दिन ऐसे दिन हैं, जिनसे जुड़ी कुछ खास मान्यताएं आज भी निभाई जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है इन दिनों खिचड़ी का सेवन न करना। जानते हैं हफ्ते के किस दिन खिचड़ी बनाने और खाने से परहेज करना चाहिए। 

हफ्ते में इन दो दिन खिचड़ी न खाने की है मान्यता

हिंदू मान्यताओं में सप्ताह के दो दिन गुरुवार और रविवार को खिचड़ी खाने से परहेज करने की परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि इन दिनों खिचड़ी का सेवन ग्रहों के संतुलन पर असर डाल सकता है।

गुरुवार का महत्व

गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इसे बृहस्पतिवार भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और सत्य नारायण की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पीले रंग का विशेष प्रभाव रहता है। इस दिन बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के लिए व्रत और पूजा की जाती है।

गुरुवार को क्यों नहीं खानी खिचड़ी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार के दिन पीली मूंग दाल से बनी खिचड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से बृहस्पति ग्रह कमजोर होता है। साथ ही काली दाल मिलाकर खिचड़ी बनाना भी अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में आर्थिक परेशानी या धन हानि हो सकती है।

रविवार से जुड़ी मान्यता

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। इस दिन भी खिचड़ी खाने से परहेज करने की परंपरा है। मान्यता है कि खिचड़ी में इस्तेमाल होने वाली काली दाल शनि ग्रह से जुड़ी होती है, जबकि सूर्य और शनि को परस्पर विरोधी ग्रह माना गया है। इसलिए रविवार को खिचड़ी न खाने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, ये सभी नियम धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। कई लोग इन्हें पूरी आस्था और परंपरा के रूप में आज भी अपनाते हैं, जिनका उद्देश्य जीवन में अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखना है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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