Roti Niyam in Hindu Tradition: भोजन बनाने और करने से जुड़े कई नियम सनातन धर्म की परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। यही कारण है कि कुछ विशेष पर्वों और तिथियों पर रोटी नहीं बनाई जाती। इन दिनों लोग व्रत करते हैं या फलाहार लेते हैं। ऐसा करने से धार्मिक नियमों का पालन होता है और आध्यात्मिक साधना को बल मिलता है। साल के कुछ दिनों में तवा चढ़ाना क्यों वर्जित है? जानिए वजह
शीतलाष्टमी की परंपरा
शीतलाष्टमी के दिन देवी शीतला की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता को ठंडा भोग प्रिय है। इस अवसर पर ताजा भोजन बनाने की बजाय एक दिन पहले तैयार किया गया बासी भोजन माता को अर्पित किया जाता है। इसी वजह से इस दिन घरों में न तो चूल्हा जलता है और न तवा चढ़ाया जाता है।
नागपंचमी का नियम
सनातन परंपरा में नागों की पूजा का विशेष महत्व है। साल का एक दिन इन्हें समर्पित है, जिसे नागपंचमी कहा जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर मान्यता है कि इस दिन तवे को अग्नि पर नहीं रखना चाहिए। इसलिए रोटी बनाने से परहेज किया जाता है। इसके स्थान पर हलवा, पूरी या अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।
शरद पूर्णिमा का महत्व
शरद पूर्णिमा को चंद्रमा की सोलह कलाओं का पर्व माना जाता है। इस दिन रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है। कई जगहों पर इस दिन रोटी बनाने की बजाय खीर और अन्य विशेष व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाती है।
दिवाली पर विशेष मान्यता
दीपावली का पर्व मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा की आराधना से जुड़ा है। कई घरों में इस दिन रोटी की जगह खीर, पूरी और अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पर्व के दिन विशेष भोग तैयार कर देवी-देवताओं विशेष रूप से भगवान गणेश, मां लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है।
महाशिवरात्रि पर व्रत
भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। इस दिन फलाहार और व्रत के खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है। यही कारण है कि कई घरों में सामान्य भोजन और रोटी बनाने से परहेज किया जाता है।
अमावस्या और पूर्णिमा
अमावस्या और पूर्णिमा दोनों तिथियां धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन दिनों कई लोग व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराओं के अनुसार भोजन से जुड़े नियम भी बदल जाते हैं। कुछ परिवारों में तवे पर रोटी बनाने से बचा जाता है और फलाहार या सादा भोजन ग्रहण किया जाता है।
मृत्यु के बाद की परंपरा
घर में किसी के निधन के बाद भी भोजन से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। मृतक के परिवार में तीन दिन तक छौंक नहीं लगाया जाता और न रोटी बनती है। आज भी कुछ जगहों पर तेरहवीं संस्कार तक यह परंपरा निभाई जाती है।
श्राद्ध पक्ष के नियम
सनातन परंपरा में श्राद्ध पक्ष पूर्वजों को समर्पित समय है। इस दौरान खान-पान में सात्विकता को महत्व देते हैं। पितरों के लिए विशेष और पारंपरिक भोग तैयार किए जाते हैं। हालांकि, रोटी बनाना पूरी तरह वर्जित नहीं माना गया है, लेकिन भोजन में पवित्रता और संयम रखने पर जोर दिया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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