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किचन में गुस्सा करना पड़ सकता है भारी! वास्तु अनुसार खाना बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान

वास्तु शास्त्र में रसोई को परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। खाना बनाते समय हमारे भाव और रसोई का माहौल भी भोजन की सकारात्मकता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कुछ आसान उपाय बताए गए हैं, जो खाने की पॉजिटिविटी बनाए रखते हैं।

cooking vastu tips- India TV Hindi
Image Source : PINTEREST खाना बनाते समय गुस्सा और तनाव से बचें

भारतीय परंपरा में भोजन पकाने के दौरान मन के भाव और स्थिति पर जोर दिया गया है, क्योंकि रसोई में भोजन के जरिए पूरे परिवार के लिए पूरे दिन की ऊर्जा तैयार होती है। वास्तु शास्त्र में भी किचन को घर की महत्वपूर्ण जगह माना जाता है। कहते हैं कि जिस भाव से भोजन बनाया जाता है, उसी के अनुरूप भोजन करने वालों के मन पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में खाना बनाते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? यहां जानिए कुकिंग से जुड़े जरूरी वास्तु नियम। 

गुस्से पर रखें काबू

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भोजन बनाते समय गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव से बचना चाहिए। अशांत मन से बनाया गया भोजन सकारात्मकता के बजाय नकारात्मक माहौल को बढ़ा सकता है। इसलिए कोशिश करें कि खाना बनाते समय मन को शांत रखा जाए और छोटी-छोटी बातों पर बहस न हो।

कटु वाणी से रहें दूर

किचन में ऊंची आवाज में बोलना, झगड़ा करना या अपशब्दों का इस्तेमाल करना भी अच्छा नहीं होता। भोजन बनाते समय मधुर भाषा और शांत वातावरण रखने की परंपरा इसी सोच से जुड़ी है। घर में बातचीत हो तो कोशिश करें कि उसका माहौल सहज और पॉजिटिव रहे।

पानी को रखें साफ

वास्तु में पानी को ऊर्जा ग्रहण करने वाला तत्व माना गया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले पानी के पात्र को साफ और व्यवस्थित रखना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पानी को गंदगी और अव्यवस्था से दूर रखने की सलाह दी जाती है।

मन अशांत हो तो ठहरें

आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में हर दिन स्ट्रेस फ्री रहना संभव नहीं है। ऐसे में खाना बनाने से पहले कुछ पल खुद को शांत करने की कोशिश करें। अपनी आस्था के अनुसार मंत्र, प्रार्थना या मधुर भजन सुनना मन को सहज बनाने का एक आसान तरीका हो सकता है।

प्यार से परोसें

भोजन तैयार करने के साथ उसे परोसने का तरीका भी मायने रखता है। मुस्कुराकर और स्नेह के साथ भोजन परोसने की परंपरा परिवार में अपनापन बढ़ाने से जुड़ी मानी जाती है। भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि साथ बैठने, एक-दूसरे को समय देने और रिश्तों में मिठास घोलने का माध्यम भी है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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