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रणजी ट्रॉफी से पहले बड़ा ड्रामा, कोर्ट-कचहरी के फेर में फंसी अरुणाचल प्रदेश की टीम, पहले मैच से हुई बाहर

क्रिकेट एसोसिएशन के आपसी विवाद और कोर्ट केस के कारण अरुणाचल प्रदेश की रणजी टीम का नागालैंड के खिलाफ 11 अक्टूबर से अहमदाबाद में होने वाला ओपनिंग मैच रद्द हो गया है। प्रशासनिक कलह की वजह से समय पर टीम का चयन नहीं हो पाने से खिलाड़ियों के भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

Narendra Modi Stadium- India TV Hindi
Image Source : AFP नरेंद्र मोदी स्टेडियम

घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत में ही अरुणाचल प्रदेश की क्रिकेट टीम के लिए बहुत बुरी खबर आई है। राज्य क्रिकेट बोर्ड के आपसी झगड़ों और कोर्ट केस के कारण टीम नागालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी का अपना पहला मैच नहीं खेल पाएगी। यह मुकाबला 11 अक्टूबर से अहमदाबाद में होना था। इसके अलावा टीम मेघालय के खिलाफ होने वाले सीके नायडू ट्रॉफी के पहले मैच से भी बाहर हो गई है। बीसीसीआई ने भी इन मैचों के रद्द होने की पुष्टि कर दी है। इस अंदरूनी कलह और कानूनी पेंच का सबसे बड़ा नुकसान वहां के युवा खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है, जिनका भविष्य और करियर इस वजह से खतरे में पड़ गया है।

क्या है पूरा मामला?

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ियों को यह बड़ा नुकसान राज्य क्रिकेट बोर्ड के आपसी झगड़ों के कारण उठाना पड़ रहा है। दरअसल, अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ARCA) के चुनावों को लेकर दो गुटों के बीच जमकर विवाद चल रहा है। कई जिला क्रिकेट एसोसिएशनों ने चुनाव में धांधली और गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, जिसके बाद यह पूरा मामला अब कोर्ट में यानी गुवाहाटी हाईकोर्ट की ईटानगर बेंच में पहुंच चुका है।

सीनियर खिलाड़ी तेची नेरी ने दिया बड़ा बयान

कोर्ट में मामला अटका होने और स्टे ऑर्डर की वजह से इस समय राज्य क्रिकेट बोर्ड में कोई वैध कमेटी या संस्था काम नहीं कर पा रही है। इसका नतीजा यह हुआ कि टूर्नामेंट के लिए अरुणाचल प्रदेश की टीम का चयन ही नहीं हो सका। टीम के सीनियर खिलाड़ी तेची नेरी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वे अभी ईटानगर में ही फंसे हैं, उनका कोई सिलेक्शन नहीं हुआ है और ना ही खिलाड़ियों के लिए कोई तैयारी या प्रैक्टिस कैंप लगाया जा सका है।

प्रोफेशनल खिलाड़ियों पर पड़ रहा है असर

इस आपसी कलह और कानूनी लड़ाई का सबसे बुरा असर उन युवा और प्रोफेशनल खिलाड़ियों पर पड़ रहा है, जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। खिलाड़ियों का कहना है कि क्रिकेट ही उनकी रोजी-रोटी का इकलौता जरिया है। इस प्रशासनिक संकट की वजह से जूनियर क्रिकेट भी बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसके चलते राज्य की अंडर-19 टीम वीनू मांकड़ ट्रॉफी में भी हिस्सा नहीं ले पाई थी।

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