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ChatGPT और Google Gemini से कितना अलग है चीनी DeepSeek R1 AI?

DeepSeek R1 AI मॉडल ने लॉन्च होते ही दुनियाभर में तहलका मचा दिया है। OpenAI के ChatGPT की तरह ही यह चीनी मॉडल लॉन्च के साथ ही चर्चा में बना हुआ है। इस AI मॉडल की वजह से अमेरिकी टेक कंपनियों की टेंशन बढ़ गई है।

Deepseek AI- India TV Hindi
Image Source : FILE डीपसीक एआई

चीनी स्टार्टअप कंपनी DeepSeek ने अपना AI मॉडल लॉन्च करके दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयर में इसकी वजह से बड़ी गिरावट देखने को मिला है। AI चिप बनाने वाली कंपनी NVIDIA का शेयर इसकी वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इसकी मुख्य वजह DeepSeek का AI मॉडल ChatGPT, Google Gemini, Meta AI के मुकाबले कम खर्चीला होना है। चीनी AI मॉडल इसकी वजह से पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना है

DeepSeek ने R1 और R1 Zero के नाम से दो AI मॉडल लॉन्च किए हैं। ये AI मॉडल ओपन सोर्स लाइसेंस पर बने हैं और ग्राहकों के लिए फ्री-टू-यूज हैं। हालांकि, DeepSeek का AI मॉडल जेनरेटिव एआई मॉडल जैसे कि ChatGPT, Google Gemini आदि से काफी अलग है। DeepSeek का AI मॉडल न सिर्फ अमेरिकी बल्कि चीनी कंपनियों अलीबाबा और बायडू के लिए भी खतरा है। इन दोनों चीनी कंपनियों ने अपने AI मॉडल को बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

DeepSeek R1 क्यों है अलग?

डीपसीक R1 एक रिजनिंग मॉडल है जिसे स्टार्टअप कंपनी डीपसीक ने एक महीने पहले लॉन्च किया है। स्टार्ट-अप कंपनी का यह AI मॉडल अन्य मॉडल के मुकाबले काफी सस्ता है और ऑग्मेंटेड रिजनिंग और एनालिटिकल कैपेबिलिटीज पर बेस्ड है। यह एडवांस लैंग्वेज पर बेस्ड AI मॉडल है, जिसे V3 की तरह ही हाईब्रिड आर्किटेक्चर पर तैयार किया गया है। DeepSeek R1 की कीमत 0.55 डॉलर (करीब 47 रुपये) प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 2.19 डॉलर (करीब 189 रुपये) प्रति मिलियन आउटपुट टोकन है, जो अन्य AI टूल के मुकाबले बेहद कम है।

चीनी AI मॉडल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे बनाने में महज दो महीने का समय लगा है। वहीं, Google, Microsoft, Meta जैसी कंपनियों को अपना AI मॉडल बनाने में 6 साल से ज्यादा का समय लगा है। इसके लिए कंपनियों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। DeepSeek के AI मॉडल के बारे में माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्य नाडेला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि इसे गंभीरता से लेना चाहिए। वहीं, OpenAI के CEO सैम ऑसल्टमैन ने अपने X हैंडल से चीनी AI मॉडल की तारीफ की है और कहा है यह काफी इंप्रेसिव है।

ChatGPT और Google Gemini जैसे AI टूल LLM यानी लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर काम करते हैं। साथ ही, ये रिजनिंग नहीं बल्कि जेनरेटिव एआई टूल होते हैं। इनमें आपको इंटरनेट पर मौजूद वही जानकारी मिलेगी, जिसके लिए उन्हें ट्रेन किया गया है। ये एआई टूल आपको वैसी कोई जानकारी नहीं देंगे, जिनके लिए इन्हें बैकएंड में ट्रेनिंग दी गई है। डीपसीक का एआई मॉडल यूजर के कमांड और रिजनिंग पर रिप्लाई देता है। ऐसे में आने वाले समय में यह अन्य AI टूल के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर सकता है।

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